अंकित तिवारी, बूंदी/कोटा (राजस्थान), NIT:

भाकपा माले ने गऊघाट में उजाड़े जा रहे गरीब दलितों के आवास और मुआवजे की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।

आवास, जमीन, ₹2 लाख का मुआवजा और रोजगार उपलब्ध कराए जाने की मांग की गई।
प्रयागराज के गऊघाट में 2 मई को पुलिस बल द्वारा सैकड़ों वर्षों से रेलवे की जमीन पर रह रहे गरीब दलितों के घरों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान पुलिस द्वारा महिलाओं पर लाठीचार्ज किया गया तथा लोगों के जरूरी सामान को तहस-नहस कर दिया गया।
इसी के विरोध में भाकपा माले द्वारा जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष पीड़ित परिवारों की आवाज उठाई गई। विरोध प्रदर्शन के दौरान जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन के जरिए पीड़ित गरीब दलित परिवारों को आवास, जमीन, रोजगार और ₹2,00,000 का न्यूनतम मुआवजा दिए जाने की मांग की गई।
मांगें पूरी नहीं होने पर पूरे प्रयागराज में बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी गई।
भाकपा माले के जिला प्रभारी सुनील मौर्य ने कहा कि विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ना बेहद शर्मनाक है। सरकार को इन गरीब दलितों को आवास, जमीन, रोजगार और ₹2 लाख का मुआवजा देना होगा, अन्यथा पूरे जिले के पीड़ित परिवार जिलाधिकारी कार्यालय पर एकत्र होकर आंदोलन करेंगे और मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
प्रदर्शन में शामिल भाकपा माले के राज्य कमेटी सदस्य व आइसा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मनीष कुमार ने कहा कि यह बुलडोजर सिर्फ गरीब दलितों पर नहीं, बल्कि संविधान पर चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब सरकार बड़े उद्योगपतियों को सस्ती दरों पर जमीन दे सकती है, तो गरीबों को भी आवास, जमीन, रोजगार और मुआवजा मिलना चाहिए।
प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ता राना परवीन ने कहा कि विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ना बंद किया जाए और उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाए। साथ ही उनके रोजगार और मुआवजे की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए, तभी सही मायनों में न्याय संभव है।
प्रदर्शन में अधिवक्ता आशीष पाल, अधिवक्ता लवकुश यादव, कामराज, सोनू, अधिवक्ता राना परवीन, छोटकी, मोहिनी, संगीता, राखी सहित दर्जनों बच्चे और महिलाएं शामिल रहीं।

