मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिले में माताओं और शिशुओं की सुरक्षा के लिए “सुरक्षित मातृत्व अभियान” चलाया जा रहा है। इसके तहत हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान कर उनकी नियमित जांच, मॉनिटरिंग और देखभाल सुनिश्चित की जा रही है, ताकि सुरक्षित प्रसव हो सके।
स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता, समर्पण और निरंतर प्रयासों से इस अभियान को हाल ही में एक और सफलता मिली है। जुन्नारदेव के ग्राम बुर्रिखुर्द की गंभीर एनीमिया से पीड़ित श्रीमती रंजीता यादव का सुरक्षित प्रसव कराया गया। सीमित संसाधनों और प्रारंभिक असहमति जैसी चुनौतियों के बावजूद, समय पर हस्तक्षेप और निरंतर मार्गदर्शन से एक जटिल स्थिति को सुरक्षित मातृत्व में बदला गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 14 जुलाई 2025 को गर्भावस्था के लगभग 10वें सप्ताह में श्रीमती रंजीता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बुर्रिखुर्द में जांच के लिए पहुंचीं। जांच में उनका हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 6 ग्राम पाया गया, जो गंभीर एनीमिया को दर्शाता है। उन्हें जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए सलाह दी गई, लेकिन शुरुआत में उनके परिवार ने वहां जाने से मना कर दिया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 21 जुलाई 2025 को मेडिकल ऑफिसर डॉ. रोहिल उम्मन, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर एवं अंतरा फाउंडेशन की टीम उनके घर पहुंची और विस्तृत काउंसलिंग की। लगातार प्रयास और समझाइश के बाद परिवार उपचार के लिए सहमत हुआ।
उन्हें संतुलित व पौष्टिक आहार लेने, नियमित रूप से आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां लेने तथा प्रथम तिमाही के बाद एफसीएम इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी गई। साथ ही उन्हें नियमित जांच के लिए पीएचसी, सीएचसी एवं पीएमएसएमए विजिट करने के लिए प्रेरित किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के मार्गदर्शन में श्रीमती रंजीता ने नियमित जांच और उपचार कराया। 11 अगस्त 2025 को उन्हें एफसीएम इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद उनके हीमोग्लोबिन स्तर में लगातार सुधार हुआ और वह सामान्य स्तर तक पहुंच गया।
निरंतर फॉलो-अप, संतुलित आहार और स्वास्थ्य टीम के सहयोग से उनकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। परिणामस्वरूप, बीते माह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बुर्रिखुर्द में उनका सुरक्षित प्रसव हुआ, जिसमें 2500 ग्राम वजन की स्वस्थ बालिका का जन्म हुआ। प्रसव के बाद उनका हीमोग्लोबिन स्तर 12.3 ग्राम दर्ज किया गया। वर्तमान में माता और बालिका दोनों स्वस्थ हैं।
यह सफलता दर्शाती है कि समन्वित प्रयास, समय पर परामर्श और नियमित जांच-उपचार से गंभीर एनीमिया जैसी जटिल स्थिति में भी सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा सकता है।

