नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

डॉ आर के पाटिल द्वारा सरकारी नौकरी का इस्तीफ़े देने के तीन साल बीत जाने के बाद भी जलगांव के जामनेर उपजिला अस्पताल को महिला विशेषज्ञ नही मिल सका है। जिला परिषद के अधीन जामनेर ब्लॉक स्तर के आरोग्य विभाग के भीतर के भ्रष्टाचार को लेकर हम अलग से रिपोर्टिंग करेंगे। महिला प्रसूती विशेषज्ञ के अभाव से नॉर्मल डिलीवरी केसेस भी जामनेर से जलगांव सिविल रेफर करने पड़ रहे हैं।
सिजेरियन डिलीवरी केसेस में जामनेर में ICU के अभाव से मामला इतना पेचीदा बन जाता है कि मरीज़ को जलगांव भुसावल के किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट कराना पड़ता है। मेहुल के भाई के पत्नी का सिजेरियन कराना था। गर्भवती का वजन अधिक लेकिन शरीर में खून की कमी के चलते सिजेरियन के दौरान रक्तचाप नियंत्रण के लिए ICU की नितांत आवश्यकता थी।
जामनेर के निजी हॉस्पिटल के ICU की कोई गारंटी नहीं होने के कारण परिजनो ने गर्भवती को जलगांव सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने पर विचार किया। लेकिन अस्पताल में मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षणार्थीयो की भीड़ ने परिजनों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया। गर्भवती को डॉ श्री लाठी के निजी हॉस्पिटल मे भर्ती किया। डॉ हर्षल चांदा ने बताया कि जामनेर उपजिला अस्पताल में अतिदक्षता के लिए दो बेड है लेकिन प्रसूति विशेषज्ञ नहीं होने के कारण वो खाली पड़े है।
हमारे सरकारी अस्पताल में स्वतंत्र रूप से ICU यूनिट नहीं है। अस्पताल की वर्तमान क्षमता 50 बेड की है जो भविष्य मे 100 बेड तक प्रस्तावित है। ज्ञात हो कि प्राइवेट हॉस्पिटल में ICU बेड का एक दिन का सेवा शुल्क 5 से 6 हजार रुपए है। महाराष्ट्र में जामनेर जैसे अन्य सैकड़ो सरकारी अस्पतालो मे ICU यूनिट नहीं होने के कारण जीवन के लिए मौत से लड़ने वाले मरीजों को मजबूरन प्राइवेट हॉस्पिटल मे एडमिट कराना पड़ता है।

