नरेंद्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

संसद के दोनों सदनों द्वारा 20 और 22 अप्रैल 2023 को पारित नारी शक्ति वंदन विधेयक (महिला आरक्षण बिल) को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। सरकार द्वारा तीन साल बाद इसके नोटिफिकेशन जारी करने के मुद्दे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज़ हो गए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार परिसीमन (Delimitation) और जातिगत जनगणना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट रुख नहीं अपना रही है। वहीं, सत्तारूढ़ दल का कहना है कि विपक्ष भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह कर रहा है।

महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रही है। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस विषय पर पार्टी लाइन के अनुरूप ही बयान दिया है, जबकि अन्य मंत्रियों की ओर से भी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इसी बीच दक्षिण भारत की राजनीति में भी हलचल बढ़ी है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने परिसीमन से जुड़े संभावित संवैधानिक संशोधनों का विरोध करते हुए ऐतिहासिक “ब्लैक शर्ट आंदोलन” का उल्लेख किया है। यह आंदोलन सामाजिक न्याय और ब्राह्मणवाद के विरोध से जुड़ा रहा है, जिसकी जड़ें ई.वी. रामासामी नायकर (पेरियार) के नेतृत्व वाले द्रविड़ आंदोलन में मानी जाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दे आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहेंगे, और इन पर सहमति बनाना सरकार और विपक्ष दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

