जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मथुरा द्वारा मुख्य सीएमओ कार्यालय में अंगदान के महत्व को समझाने हेतु एक शिविर का किया गया आयोजन | New India Times

अली अब्बास, ब्यूरो चीफ, मथुरा (यूपी), NIT:

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मथुरा द्वारा मुख्य सीएमओ कार्यालय में अंगदान के महत्व को समझाने हेतु एक शिविर का किया गया आयोजन | New India Times

उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ तथा जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मथुरा के निर्देशानुसार आज दिनांक 27 नवंबर 2023 को जिला मुख्य चिकित्साधिकारी, मथुरा के कार्यालय में अंगदान के महत्व को समझाने हेतु एक शिविर का आयोजन किया गया। उक्त शिविर की मुख्य अतिथि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मथुरा की सचिव श्रीमती नीरू शर्मा रही। शिविर में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अजय कुमार वर्मा, डिप्टी सी.एम.ओ. डॉ. रोहिताश सिंह, डॉ. चित्रेश निर्मल, डॉ. भूदेव, ए.एन.एम. की प्रिंसिपल श्रीमती ज्योति सहित नर्सिंग छात्राएं उपस्थित रही। शिविर का संचालन डिप्टी सीएमओ डॉ रोहिताश द्वारा किया गया।

उक्त शिविर में डिप्टी सीएमओ डॉ रोहिताश द्वारा बताया गया कि अंगदान, जिसे ऑर्गन डोनेशन भी कहा जाता है, एक नोबल क्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने शरीर के अंगों को अन्य व्यक्तियों के लिए दान करता है। यह एक मानवीय सेवा है जो न केवल जीवन बचाने में मदद करती है, बल्कि उन व्यक्तियों को भी एक नई जिंदगी का अद्भुत अवसर प्रदान करती है जिन्हें इसकी आवश्यकता होती है।

शिविर के आयोजक मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अजय कुमार वर्मा द्वारा उपस्थित नर्सिंग छात्राओं को अंगदान के बारे में जागरूक करते हुए बताया कि अंगदान दिवस हर वर्ष 13 अगस्त को मनाया जाता है, यह दिन हम सभी को याद दिलाता है कि जीवन एक अनमोल उपहार है और हमारे शरीर के अंगों को दूसरों के लिए दान करके हम उन्हें एक नई जिंदगी का मौका दे सकते हैं। अंगदान एक मानवीय कार्य है जो न सिर्फ एक व्यक्ति को, बल्कि पूरे समाज को उन व्यक्तियों के साथ जोड़ने का माध्यम बना सकता है। एक व्यक्ति की मौत के बाद, उसके शरीर के अंगों को दूसरों को देने से हम नए जीवन की शुरुआत कर सकते हैं और उन्हें एक दूसरे के साथ जोड़कर समृद्धि और समरसता का अहसास करा सकते हैं। ऑर्गन डोनेशन से एक व्यक्ति सिर्फ जीवन को ही नहीं बचा सकता है, बल्कि उसकी मौत के बाद भी वह दूसरों के लिए सकारात्मक रूप से योगदान कर सकता है।

उक्त शिविर के समापन पर सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अंगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक युग में जीवन भर रहता है अंधकार, लेकिन जब हम किसी के जीवन में प्रकाश डालते हैं, तो हम उसे एक नया दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। अंगदान दिवस, जो प्रतिवर्ष 13 अगस्त को मनाया जाता है, एक ऐसा मौका है जब हम एक नए जीवन के आरंभ का हिस्सा बन सकते हैं, दूसरों को जीवन का उपहार देकर। अंगदान का मतलब है व्यक्ति की मौत के बाद उसके शरीर के अंगों को अन्य व्यक्तियों को दान करना। यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है जो एक व्यक्ति और उनके परिवार को अपने समय में करता है, लेकिन इसका प्रभाव उसकी मौत के बाद भी दुनिया में बना रहता है।

अंगदान के माध्यम से, व्यक्ति न सिर्फ अपने जीवन में बल्कि अन्य के जीवन में भी बड़ा परिवर्तन ला सकता है। दान किए गए अंग जीवन बचाने और उसे सुधारने का माध्यम बन सकते है। एक किड़नी, हृदय, आँख या एक्स्ट्रा अंग द्वारा एक व्यक्ति को नई जिंदगी मिल सकती है, जिससे उनका सारा अनुभव बदल सकता है। इस प्रकार के सामाजिक और नैतिकता का परिचय कराने के लिए हर वर्ग को अंगदान के महत्व को समझाना चाहिए। इसे एक साझा जिम्मेदारी के रूप में देखा जा सकता है जो हर व्यक्ति को उसके समाज में निभानी चाहिए। अंगदान की प्रक्रिया शुरू होने से पहले, लोगों को इसके लाभों और प्रक्रिया के बारे में सही जानकारी प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। इसका मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को अपने जीवन को अनधिकृत रूप से समाप्त करना है, बल्कि उसका जीवन दूसरों के लिए सहारा बन सकता है।

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