नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

कपास के दर काफी कम हो गए हैं, 12 हजार का दाम आज 6500 हो गया है इससे किसानो में चिंता का माहौल है। आज भी 60 फीसद कपास किसानों के घर में पड़ा है। दर बढ़ोतरी के लिए कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय हुआ कि इस मसले पर केंद्र सरकार से बात कर कपास की निर्यात को लेकर कुछ फैसला लिया जाता है कि नही इस पर CM/DCM केंद्र के मंत्रियों से चर्चा करेंगे। मंत्री परिषद की बैठक के बाद यही बयान गिरीश महाजन ने जलगांव के अमलनेर मंगलग्रह मंदिर के विस्तारित श्रृंखला के भूमिपूजन के बाद दिया। सिंचाई विभाग के प्रोजेक्ट्स पर महाजन ने बताया कि वाघुर डैम के लिए 900 करोड़ रुपए का फंड उपलब्ध कराया गया है। पडालसे डैम को भी फंड दिया जाएगा। ज्ञात हो कि भाजपा कोटे से महाजन एक ऐसे मंत्री है जो मिडिया के सहयोग से किसी भी विषय को लेकर बेहतर तरीके से कैमरा फेस कर लेते हैं। कपास के दामों को लेकर महाजन के बयान के बाद राज्य सरकार की भूमिका पूरी तरह से साफ हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय मार्केट का बेतुका हवाला देकर राज्य ने यह गेंद केंद्र के पाले में डाल दी है, इसका सीधा मतलब है कि किसान अब कपास के दाम में वृद्धि की उम्मीद छोड़ दें।
आयात निर्यात नीति फेल: केंद्र सरकार ने इस साल 45 के बजाय 30 लाख टन देसी कपास निर्यात की जब कि 16 लाख टन विदेश से भारत मे आयात कर ली जिसके कारण लोकल मार्केट मे स्थानीय कपास के दाम तेजी से गिरते गए। राज्य सरकार के मंत्रियों को गोलमाल बयान देने से बचते हुए उक्त सच्चाई को जनता के सामने रखकर किसानों से माफी मांग लेनी चाहिए।
