वाकोद फत्तेपुर खंड में पड़े ओले, ज्वार मक्का की फसलें खराब, कर्नाटक चुनाव के लिए वोट मांगने में व्यस्त हैं सरकार के मंत्री | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

वाकोद फत्तेपुर खंड में पड़े ओले, ज्वार मक्का की फसलें खराब, कर्नाटक चुनाव के लिए वोट मांगने में व्यस्त हैं सरकार के मंत्री | New India Times

मौसम विभाग ने दो दिन तक उत्तर महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बारिश होने की बात कही है। जलगांव जिले के अमलनेर, भुसावल ब्लाक में ओलों के साथ तेज बारिश हुई। भुसावल के साकेगांव से NIT के नियमित पाठक प्रो राजेश खड़के ने हमें ओलों की कुछ तस्वीरें भेजी हैं जो इस खबर में प्रकाशित की गई है। जामनेर तहसील के वाकोद फत्तेपुर खंड क्षेत्र में ओले गिरे जिसके कारण ज्वार मक्का की फसलें बुरी तरह से खराब हो गई हैं। कंचे की आकार जैसे ओले गिरने से फल वर्गीय फसलें (नींबू, आम, केला) पेड़ से झड़ गई हैं।

वाकोद फत्तेपुर खंड में पड़े ओले, ज्वार मक्का की फसलें खराब, कर्नाटक चुनाव के लिए वोट मांगने में व्यस्त हैं सरकार के मंत्री | New India Times

झमाझम हो रही बेमौसमी बारिश के चलते इस साल किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस महीने लगातार छह बार मूसलाधार बारीश हुई है। शिंदे फडणवीस सरकार की शक़्ल में कार्यरत डबल इंजिन सरकार का आधा अधूरा मंत्री मंडल किसानों की समस्याओं से किनारा कर चुका है। नैसर्गिक आपदा से पीड़ित किसानों की मदद के लिए नियमों में परिवर्तन कर सरकार ने सहायता राशि को घटा दिया है। बारिश के कारण जिस ब्लॉक में सबसे ज्यादा खेती बर्बाद हुई है वो मंत्री गिरीश महाजन का अपना निर्वाचन क्षेत्र है। महाजन बीते कई दिनों से कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रचार के लिए बेलगावी में डेरा डाले हुए हैं (स्टार प्रचारकों में उनका नाम शामिल नहीं है)। वहाँ की 10 सीटों पर पार्टी को जितवाने की जिम्मेदारी महाजन को सौंपी गई है। सरकार के तमाम मंत्री इस चुनाव में भाजपा के लिए वोट मांगने में व्यस्त हैं। जिले के संरक्षक मंत्री गुलाबराव पाटिल शिवसेना बनाम शिवसेना इस नाटिका में रममाण हैं। माध्यमों ने प्रदेश में सब कुछ अलबेल जैसा माहौल बनाकर रखा हुआ है।

कपास के कारण मार्केट ठप

किसानों की आय दुगनी करने की हामी भरने वाली मोदी सरकार के राज में कपास को MSP नहीं मिलने के कारण किसान कर्ज में डूब चुके हैं। आज कपास महज 7 से 8 हजार के दर से बेचना पड़ रही है। कपास की दुर्गति के कारण छोटे मोटे व्यापार का सारा का सारा मार्केट ठप हो गया है। जिले में खामगांव, पुणे, छत्रपति संभाजी नगर, शेन्द्रा जैसी MIDC भी नहीं की कारखानों की बदौलत अर्थचक्र की गति बनी रहती। बीते 30 बरस में महाजन जामनेर में एक भी रोजगार देने वाला बड़ा प्रोजेक्ट नहीं लगा सके हैं।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Gift this article