नरेंद्र कुमार, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

तीन महीने पहले जब सूबे में सत्ता का खेल चल रहा था उस दौरान पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठाकर अफसरशाही ने राज्य के कई शहरों में गैरकानूनी तरीके से अतिक्रमण निकाल फेंका. जामनेर में ठीक ऐसा ही किया गया, बुलडोजर से गरीबों की लाखों रुपयों की संपत्ति कुचल दी गई. अतिक्रमण के नाम पर जूना बोदवड सड़क पर दोतरफा उखाड़ी गई नालियों की निगम की ओर से बाद में मरम्मत नहीं की गई जिसके चलते आए दिन हो रही झमाझम बारिश का पूरा पानी नालियों से सीधे घरों और दुकानों में घुस रहा है. इलाके मे हो रहा जलजमाव डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों को न्यौता दे रहा है. वहीं शहर के नए रिहायशी इलाकों में अलग ही समस्या है वह यह कि 70 करोड़ रुपये खर्च कर बनाई गई भूमिगत ड्रेनेज सिस्टम के तहत खोदे गए चेंबर्स में वेंटिलेशन के अभाव से गैस भराव का कारण बनते नजर आ रहे हैं. इन्हीं चेम्बर्स से पाइप्स के जरिये जोड़े गए सभी निजी शौचालयों में चोकअप की शिकायतें आने लगी हैं जिसे सुलझाना आम लोगों को काफी महंगा साबित हो रहा है. निगम के सदन मे विपक्ष को लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव के रास्ते ख़त्म कर दिया गया है शहर मे चल रहे एकतरफा निजाम मे कमाल का जमाल है . बहरहाल मार्च 2023 मे निगम के आम चुनाव होने है जिसमे यह देखना रोचक होगा कि सत्ता को लेकर कोई पारंपरिक समझौता होता है या फिर विधानसभा चुनाव के लिए सत्ता का प्रभाव बरकरार रखा जाता है .
ब्रिजेस का पीछा नही छोड़ रहे गड्ढे – 8 करोड़ रुपये से बनी शहर की अंदरूनी फोरलेन सड़क पर स्थित पुराने पत्थर के ब्रिजेस पर बारिश के कारण लगातार गड्ढे पड़ते जा रहे है . ठेकेदार ने नए ब्रिज बनवाने के बजाय पुराने ब्रिजो को वैसा हि रखकर उनका विस्तार करवाया है . पुराने ब्रिज किसी भी समय ज़मीदोज़ हो सकते है . हमने इस विषय मे सटीक रिपोर्ट जारी की थी तब हैरान करने वाली बात हुई कि PWD की निगरानी मे गड्ढो को रफ़ू किया गया . मामले को लेकर PWD का विजिलेंसी डिपार्टमेंट की ओर से अब तक कोई संज्ञान नही लिया गया है शायद लेनदेन से सारी सेटिंग हो गई होगी.
