नरेंद्र कुमार, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

एक समारोह में आमंत्रित महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोशियारी ने अपने भाषण में शिवाजी महाराज का उल्लेख राज शिष्टाचार का उल्लंघन कर किया. उन्होंने कहा कि “समर्थ रामदास के बिना शिवाजी को कौन पूछेगा” इस बयान से राज्यपाल ने शिवाजी महाराज के पराक्रम और शौर्य का अपमान किया. समर्थ रामदास को शिवाजी महाराज के गुरु के रूप में थोपने की कोशिश की. राज्यपाल द्वारा की गई इस टिप्पणी की हम कड़ी निंदा करते हैं, ऐसा प्रतिपादन NCP नेता संजय गरुड़ ने किया है. ब्लाक राष्ट्रवादी कांग्रेस की ओर से निगम तिराहे पर आयोजित निषेध सभा में गरुड़ बोल रहे थे. गरुड़ ने कहा कि राज्यपाल भाजपा के पोपट हैं, अभी तो मैं यह कहूंगा कि राज्यपाल को रुद्राक्ष की मालाएं पहनाकर हिमाचल भेज दिया जाना चाहिए ताकि वो समाधी ले सकें. उक्त तरीके से किसी के द्वारा शिवाजी महाराज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी आने पर उसका निषेध तक करने के लिए आगे नहीं आना इससे एक बात साफ होती है कि भाजपा का शिवाजी महाराज के प्रति व्यक्त किया जाने वाला प्रेम शुद्ध नाटक है, दोगलापन है.
प्रहार के प्रदीप गायके ने राज्यपाल के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि राज्यपाल अपने बयान के लिए माफी मांगें. आंदोलन मे डॉ प्रशांत पाटील, जितेश पाटील, नरेंद्र जंजाल, जावेद मुल्लाजी, माधव चव्हाण, मनोज महाले समेत अन्य संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए. विदित हो कि दो दिन पहले राज्यपाल भगतसिंह कोशियारी ने एक निजी साहित्य समारोह में कहा कि “चाणक्य के बिना कौन चन्द्रगुप्त को पूछेगा, समर्थ रामदास के बिना कौन शिवाजी को पूछेगा” इस बयान के बाद सभी दलों और परिवर्तनवादी संगठनों के वैचारिक हमलों से घिर चुके कोशियारी ने बाद में खुद का बचाव करने के तमाम प्रयास किए पर बयान वापस लेने की पुष्टि नहीं की. राज्यपाल के बयान से भाजपा ने खुद को दूर रखते हुए कोई टिप्पणी नहीं की, इसका मतलब गरुड़ के कहे मुताबिक कोशियारी भाजपा के तोते हैं. शिवाजी महाराज के गुरु के संबंध में इससे पहले भी अतीत में विवाद खड़ा किया गया है जिस पर इतिहास संशोधकों ने तमाम तथ्यों के साथ इस बात को साबित कर दिया है कि समर्थ रामदास जो हैं वह शिवाजी महाराज के गुरु नहीं थे, शिवाजी महाराज की गुरु उनकी माँ जिजामाता ही हैं.

