अंकित तिवारी, शंकरगढ़ (यूपी), NIT:

टोंस नदी में लगातार हो रहे अवैध बालू खनन के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने कड़ा रुख अपनाते हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। संगठन के मंडल अध्यक्ष बबलू दुबे के निर्देश पर 15 दिसंबर 2025 से किसान और कार्यकर्ता भाकियू के बैनर तले पुलिस चौकी पर धरने पर बैठ गए हैं। मंडल अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि जब तक खनन माफियाओं के खिलाफ ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

भाकियू (अराजनैतिक) के पदाधिकारियों का आरोप है कि तहसील मेजा के थाना खीरी क्षेत्र अंतर्गत मौजा खूझी रेंगा, कोटर, खरका, पिपरहटा सहित दर्जनों घाटों पर बेखौफ होकर अवैध बालू खनन किया जा रहा है। इससे न केवल सरकार को भारी राजस्व हानि हो रही है, बल्कि पर्यावरण को भी अपूरणीय क्षति पहुंच रही है।

जिला महासचिव अंकुश शुक्ला ने बताया कि अवैध खनन के कारण नदी के घाटों को गहराई तक काट दिया गया है, जिससे बरसात के दिनों में टोंस नदी का पानी बांध के ऊपर तक पहुंच जाता है। हर वर्ष बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, जिसका सीधा असर आसपास के गांवों और किसानों की खेती पर पड़ता है और फसलें नष्ट हो जाती हैं।
किसान नेताओं ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर पूर्व में कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया। 12 नवंबर 2025 को जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी सत्यम मिश्रा एवं खनन अधिकारी को सौंपा गया था। इसके बाद 19 नवंबर 2025 को उपजिलाधिकारी मेजा को भी ज्ञापन दिया गया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
इसी के विरोध में भाकियू (अराजनैतिक) ने मंडल अध्यक्ष बबलू दुबे के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन जन आंदोलन की शुरुआत की है। आंदोलन में प्रदेश सचिव लाल पुष्पराज सिंह, जिला सचिव अंकुश शुक्ला, यमुनानगर अध्यक्ष दीपक तिवारी, तहसील अध्यक्ष आशीष शुक्ला, ब्लॉक अध्यक्ष शंकरगढ़ पंकज कुशवाहा, राहुल द्विवेदी, अमित शुक्ला सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
यमुनानगर अध्यक्ष दीपक तिवारी ने चेतावनी दी कि जब तक अवैध बालू खनन में लिप्त माफियाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं होती और कटे हुए घाटों को सुरक्षित नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान यदि किसी भी कार्यकर्ता को कोई क्षति पहुंचती है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
