नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

जलगांव में किसान संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर मोर्चा निकाला। कांग्रेस शिवसेना UBT NCP शरदचंद्र पवार ने इस आंदोलन का प्रत्यक्ष समर्थन किया। फ़सल बीमा योजना में हो रही धांधली , केला उत्पादक किसानो की परेशानी जैसे विषयों को लेकर पूर्व मंत्री ओमप्रकाश बच्चू कङू , पूर्व सांसद उन्मेष पाटिल प्रमोद पाटिल कुलभूषण पाटिल प्रदीप पवार जमील देशपांडे सुनील देवरे ने हजारों किसानों की मौजूदगी मे सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। शिवतीर्थ से कलेक्ट्रेट पहुंचे मार्च ने शांति के साथ नेताओं को सुना। कलेक्टर को अपना दुखड़ा सुनाने के लिए आतुर पीड़ित किसानो ने सुरक्षा घेरा फांद दिया। कलेक्टर को अपनी केबिन को ओपन कोर्ट हॉल बनाना पड़ा।

प्रशासन ने नेताओं किसानों को सुना और 15 दिन के अंदर सभी मांगे पूरी करने का वादा किया। दूसरे दिन अखबारों के संस्करणों में इस आंदोलन को कमतर आंकने के लिए बेबुनियाद तरीके से आंकड़ों का भ्रम तैयार किया गया। खबर के नाम पर किसान और कार्यकर्ता की संख्या को लेकर पेज भरे गए। अगर यही आंदोलन बीजेपी ने किया होता तो नेताओ की तारीफ़ के लिए शब्दकोश खंगाले जाते गहन अध्ययन से नायब हेडलाइने लिखी जाती। उपस्थिति के आंकड़ों की जगह प्रचंड विशाल अपार भव्य दिव्य अदभुद और न जाने कितने हि शब्द चुने जाते। सूत्रों के मुताबिक किसान आंदोलन में 20/25 हजार लोगों ने शिरकत करी।

ज्ञात हो कि मराठी भाषा कोष में आंदोलन के लिए उन्मेष शब्द का प्रयोग किया जाता है। जिला पुलिस ने बुधवार 19 सितंबर को उन्मेष पाटील ओमप्रकाश बच्चू कङू समेत अन्य 11 आंदोलकों पर बीएनएस की संगीन धाराओं के तहत मामले दर्ज किए। राजनीतिक जानकारों की माने तो चुनाव आयोग के आका ज्ञानेश कुमार गुप्ता की ख़ामोशी के कारण वोट चोरी के साबित आरोपों का सामना कर रहे बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व के सामने दिल्ली की सत्ता बचाने के लिए महाराष्ट्र में नेतृत्व परिवर्तन के सिवाय कोई विकल्प नहीं है।
