मूर्धन्य साहित्यकार पं. मुरलीधर पांडेय ने बढ़ाया भाईंदर का गौरव, लखनऊ प्रेस क्लब में हुए सम्मानित | New India Times

साबिर खान, मीरा-भाईंदर/मुंबई (महाराष्ट्र), NIT:

मूर्धन्य साहित्यकार पं. मुरलीधर पांडेय ने बढ़ाया भाईंदर का गौरव, लखनऊ प्रेस क्लब में हुए सम्मानित | New India Times

आर.एन. पी. पार्क निवासी हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार, राष्ट्रीय स्तर की हिंदी त्रैमासिक पत्रिका ‘संयोग साहित्य’ के प्रखर संपादक पं. मुरलीधर पांडेय को उनके गद्य व पद्य विधा में लेखन, साहित्यसृजन, साहित्यसेवा के लिए उत्तरप्रदेश प्रेस क्लब, लख़नऊ के प्रांगण में हिंदी के साहित्यकारों की संस्था ‘ काव्य कला संगम ‘द्वारा’ आचार्य रामदेव लाल ‘विभोर’ सम्मान- 2025 शॉल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह, सम्मान-पत्र, सम्मान-राशि, पुष्पगुच्छ देकर सार्वजनिक रूप से भव्य सम्मान किया। इस अवसर पर गोंडा जनपद से पधारे प्रखर पत्रकार सियाराम पांडेय एवं मुंबई से वरिष्ठ-पत्रकार सुभाष पांडेय विशेष रूप से उपस्थित थे।

मूर्धन्य साहित्यकार पं. मुरलीधर पांडेय ने बढ़ाया भाईंदर का गौरव, लखनऊ प्रेस क्लब में हुए सम्मानित | New India Times

गौरतलब है कि, 76 वर्षीय साहित्यमनीषी पंडित मुरलीधर पांडेय ने इस अवसर पर तरन्नुम में अपनी कई रचनाएं सुनाई। उत्तरप्रदेश के लखनऊ में देश भर से आये तमाम कवि, लेखक,पत्रकार, गीतकार, साहित्यकार पंडित मुरलीधर के गीतों को सुनकर मंत्रमुग्ध हो गये। इस अवसर पर उनकी एक पंक्तियों पर जोरदार तालियों के साथ दाद मिली- ” जलता है जो देखकर, उसे जलने दो /  जब तक वह जलेगा तुम्हें रोशनी ही देगा। ” सम्मानित होनेवालों में सर्वश्री पंडित मुरलीधर पांडेय, उमेशचंद्र दुबे, बाराबंकी के रामकिशोर तिवारी, महमूदाबाद के अवधेश गुप्त और डॉ. सुषमा सौम्या शामिल रहीं।

मूर्धन्य साहित्यकार पं. मुरलीधर पांडेय ने बढ़ाया भाईंदर का गौरव, लखनऊ प्रेस क्लब में हुए सम्मानित | New India Times

समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉ. हरिशंकर मिश्र ने कहा कि विभोर जी का कृतित्व का महत्त्वपूर्ण वैशिष्ट्य है कि उन्होनें प्रासंगिक विपुल साहित्य की सर्जना की और लक्षण ग्रंथ भी लिखे। वस्तुतः वे आचार्य कवि की कोटि में आनेवाले मनीषी हैं। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व प्रेरक और मार्ग दर्शक है। मुख्य अतिथि डॉ. राम कठिन सिंह ने कहा कि अप्रतिम साहित्यिक प्रतिभा के धनी रामदेव लाल उच्च कोटि के कवि तो थे ही, साथ ही  छंदास के महत्त्व को समझने के लिए जो शोधपूर्ण कार्य किया, वह अद्वितीय है। साहित्यभूषण मधुकर अष्ठाना ने विभोर जी के लिये मुक्तक सुनाया। संस्था के अध्यक्ष डॉ.गोपाल कृष्ण शर्मा ‘ मृदुल ‘ ने कहा कि विभोर जी में कवि और आचार्य का दुर्लभ मणि-कांचन संयोग था। विभोर जी के पुत्र व संस्था महामंत्री राजेश श्रीवास्तव के अलावा मुकेश श्रीवास्तव, बृजेश श्रीवास्तव, अखिलेश श्रीवास्तव व विकास श्रीवास्तव समेत पूरा परिवार मौजूद रहा।

पंडित मुरलीधर पांडे को यह सम्मान मिलने पर ‘ श्री भाईंदर गुजराती समाज ‘ के अध्यक्ष विजय पारिख, चिंतन पारिख, ‘  राहुल एजुकेशन ‘ के चेयरमैन लल्लन तिवारी, राहुल तिवारी, पंडित उमाशंकर तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, एडवोकेट आर. जे. मिश्रा, एडवोकेट राजकुमार मिश्रा, डॉ उमेश शुक्ला, प्रोफेसर विजय मिश्रा, भाजपा नेता उपेंद्र सिंह ‘ वत्स ‘ , अभयराज चौबे , वैद्य बी.बी चौबे ‘ रसिक ‘, पूर्व नगरसेवक मदन सिंह, हंसकुमार पांडेय, युवा कवि किरण चौबे ‘ अविरत ‘ ,  डॉ. सुनील चोपड़े, पंडित ब्रह्मराज मिश्र, पुर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप सिंह, टेक्सटाइल इंजीनियर प्रमोद तिवारी, कर्मठ समाजसेवक परशुराम लोधिया, ‘ मीरा-भाईंदर प्रेस क्लब ‘ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश लिमये,  समेत अनेक गणमान्य लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए उन्हें बधाई दी है।

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