नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

मोदी सरकार की गलती के कारण आतंकवादियों ने पहलगाम में 26 भारतीयों की हत्या कर दी। सरकार पर इस हमले का बदला लेने का दबाव बढ़ता जा रहा है। जाति नहीं पूछी धर्म पुछा इस बकवास के बाद अदानी-अंबानी मीडिया पर “पानी रोक देंगे” वाला नया ट्रेंड चलाया जा रहा है। 1960 कराची में विश्वबैंक के हवाले से भारत-पाकिस्तान के बीच की गई द्विपक्षीय सिंधु नदी संधि की परते खुल रही है। रावी, ब्यास, सतलुज पूर्व प्रपाती नदियां हैं। मानसून में इनका 70% पानी पाकिस्तान को छोड़ना पड़ता है 30% ही भारत स्टोर कर पाता है। संधि के मुताबिक सिंधु, चिनाब, झेलम पश्चिम प्रवाही नदियों का पानी पाकिस्तान को देना है। 2016 नृपेंद्र मिश्र के अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स फिर 2021 में सिंधु संधी सर्वे रिपोर्ट संसद में आया।
रावी पर बना रणजीत सागर ओवर फ्लो होने पर ब्यास के पोंग डैम में पानी डालना पड़ता है। पोंग ओवर फ्लो होने के बाद सतलुज के भाखड़ा नांगल डैम में पानी को मोड़ना पड़ता है। आगे यह पानी पंजाब हरियाणा राजस्थान के नहरों से मिलता है। सिंधु चिनाब झेलम से बहने वाले 117 अरब क्यूबिक मीटर पानी को रोकने के लिए भारत को टिहरी जैसे तीस डैम बनाने पड़ेंगे जो नाकाफी हैं और इन्हें बनाने के लिए 30 साल का समय लगेगा। हजारों नई नहरों का निर्माण कर उनको दक्षिण की ओर निकलना होगा, पुरानी नहर को तेज़ी से रिपेयर करना होगा। पांच करोड़ साल पुरानी सिंधु नदी प्रणाली में मानसून की आकस्मिक बारिश के कारण उत्तर भारत में बाढ़ के हालात बनते बिगड़ते रहते हैं।
क्या भारत प्रकृति के साथ संधि करने की क्षमता रखता है? जवाब है “हां” रखता है लेकिन इसके लिए प्रचुर मात्रा में धन की आवश्यकता होगी। सिंधु नदी संस्कृति पर मराठी हिन्दी अंग्रेजी में लिखी सैकड़ों शानदार किताबे हैं। पंडित नेहरू अशोक राणा कॉ शरद पाटील इरफान हबीब अरुंधति रॉय यदुनाथ सरकार जैसे नामचीन खोजी लेखको ने indus Vally और उसके संस्कृति पर खूब लिखा है।
हमने सोशल मीडिया और किताबों से मिली जानकारी के आधार पर इस रिपोर्ट को फ्रेम करने का प्रयास किया है।
