नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

किसी अधिकारी से लोग इतने त्रस्त हो कि उसका तबादला होने पर खुशियां मनाने लगे तो यह आलम उस नेता के लिए खतरे की घंटी है जिसने उस अधिकारी को कमीशन के पैसों के लिए संरक्षण दिया है। जलगांव लोक निर्माण विभाग में बीते 13 सालों से कुर्सी गरम कर रहे मुख्य इंजीनियर प्रशांत सोनवने का सरकार ने छत्रपति संभाजी नगर औरंगाबाद में संभागीय आयुक्त के दफ़्तर में किसी एक टेबल पर तबादला कर दिया है। बजट सत्र में विधायक एकनाथ खडसे ने प्रशांत को लेकर की जा रही जांच प्रक्रियाओं का कच्चा चिठ्ठा सदन में रखा। खडसे के आरोपों के बाद बीते साल गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट आज तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।

सोनवने पर सरकार के इजाज़त के बिना विदेश यात्रा करने का आरोप लगा है। प्रशांत के साथ प्रांजल पाटील भी तबादले में नपे गए हैं। सोनवने के मनमाने और भ्रष्ट कामकाज के खिलाफ़ जलगांव नासिक PWD में सैकड़ों RTI दायर किए जा चुके हैं जो सूचना आयुक्त नासिक के मेज़ पर कई सालों से सुनवाई के लिए लंबित है। नासिक PWD के साथ जलगांव का कामकाज देखने वाले सोनवने की निजी जिंदगी उनके द्वारा धारण किए पद और रसूख के प्रभाव से बेहद खुशनुमा किस्म की बताई जा रही है।
संपत्ति की जांच की मांग: कट प्रैक्टिस का चस्का लग चुके एक मंत्री के संरक्षण के कारण प्रशांत सोनवने जैसे भ्रष्ट अधिकारी को जिलाबदर करने मे फडणवीस सरकार ने काफ़ी देर कर दी है। प्रशासन को नजदीक से समझने वाले तत्वों की ओर से सोनवने की चल अचल संपत्ति की जांच कराने की मांग की जाने लगी है। राजनीति जब करवट बदलेगी तब महाराष्ट्र के दर्जनों मंत्री और सोनवने सरीखे बड़े अधिकारी से लेकर तालुका स्तर पर काम कर रहे TMO’s TO’s जैसे हजारों भ्रष्ट मुलाजिम ED CBI Income Tax Department का पसंदीदा भोजन होंगे।
