नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के ठीक पहले मोदी सरकार ने मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा दिया। देवेन्द्र फडणवीस और उनकी बीजेपी ने इस निर्णय को खूब प्रचारित किया और वोट भी हासिल किए। फडणवीस की सरकार बनते हि महाराष्ट्र शासन के आधिकारिक फ़ेसबुक पेज बताए जाने वाले Maharashtra DGIPR पर मराठी की जगह अंग्रेजी ने ले ली है। राज्यपाल , मुख्यमंत्री , मंत्री परिषद सदस्यों के सरकारी और पार्टी पुरस्कृत कार्यकलापों की संक्षेप जानकारी को मिनट टू मिनट DGIPR पर अंग्रेजी भाषा में अपलोड किया जा रहा है। एकनाथ शिंदे के CM रहते DGIPR पर प्रकाशित की जाने वाली जानकारी मराठी भाषा में हुआ करती थी।

फडणवीस सरकार आम जनता से क्या छुपाना चाहती है जो जनता अंग्रेजी में पढ़ने पर समझ न सके? सरकार में बैठे 90% मंत्री पंधरा मिनट किसी विषय पर अंग्रेजी में बात नही कर सकते न हि अंग्रेजी समझ सकते है। ये मंत्री विदेश जाते है तो टेलीप्रांमटर का सहारा लेते है ऐसी स्थिती में राज्य की जनता को राजकाज का ब्यौरा अंग्रेजी मे दिया जा रहा है। मराठी भाषा के उपहास को लेकर देवेन्द्र फडणवीस सरकार का यह दोगलापन किस बात को सुनिश्चित करना चाहता है। सरकार की इस हरकत पर एकनाथ शिंदे और अजीत पवार की पार्टी चुप है।

अगर आप फ़ेसबुक उपभोक्ता है तो खुद अपने मोबाइल फोन पर Maharashtra DGIPR के हर एक पेज को चेक कर सकते है। महाराष्ट्र के बड़े बड़े विपक्षी नेताओं के पेजेस पर प्रकाशित जानकारियों को भी अंग्रेजी मे देखा जा सकता है। सरकार को इस मामले मे समाज माध्यम के तकनीकी सिस्टम और अपने कथित प्रशासनिक फैसलों की जांच करनी चाहिए।
