प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान ग्वालियर में एक दिवसीय 'POSH' ट्रेनिंग प्रोग्राम का हुआ आयोजन | New India Times

गुलशन परूथी, ग्वालियर (मप्र), NIT:

प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान ग्वालियर में एक दिवसीय 'POSH' ट्रेनिंग प्रोग्राम का हुआ आयोजन | New India Times

प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान, ग्वालियर में एक दिवसीय ‘POSH’ ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया गया, यह ट्रेनिंग प्रोग्राम संस्थान के ही प्रागंण में दिनांक 31 अगस्त 2024 को आयोजित किया गया।

इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य सभी फैकल्टी तथा स्टाफ मैम्बर्स को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित कानूनों, नीतियों और आचार सहिंता के बारे जागरूक करना था तथा संस्थान में बनी आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के कार्य करने के तरीके से अवगत कराना था।

संस्थान के निदेशक डॉ. निशांत जोशी ने बताया कि ‘POSH’ अधिनियम के माध्यम से हम महिला कर्मचारियों पर भविष्य में होने वाले यौन तथा मानसिक उत्पीड़न को रोक सकते हैं जब कोई भी महिला कर्मचारी संस्थान में काम करती है तो उसको सुरक्षापूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिये तथा उन्होनें ये भी बताया कि ‘POSH’ के अंदर आने वाले मामलों को निपटाने के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) है जो अपना काम पूरी इमानदारी से कर रही है।

संस्थान सह निदेशिका डॉ. तारिका सिंह सिकरवार ने बताया कि आज के समय में कार्यस्थल पर महिला के ऊपर यौन तथा मानसिक उत्पीड़न दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। सरकार ने ‘POSH’ अधिनियम को बनाकर एक सराहनीय काम किया है। जिसके माध्यम से महिलाएं बिना किसी डर के अपने कार्यस्थल पर जाकर काम कर सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हमारे संस्थान में जो भी महिला कर्मचारी है, उन सभी की यौन उत्पीड़न तथा मानसिक उत्पीड़न से सुरक्षा करना हमारी प्राथमिक ज़िम्मेदारी है।

इस ट्रेनिंग प्रोग्राम की रिसोर्स पर्सन मिस रीमा राजावत, कोरपैक्स, पी.आई.एम.आर., इंदौर ने बताया कि ‘POSH’ अधिनियम की शुरूआत विषाखा केस के माध्यम से हुई थी। तथा उन्होंने ‘POSH’ अधिनियम को महिला कर्मचारियों के लिये वरदान स्वरूप बताया और उन्होंने कहा कि जब भी महिलाएं अपने कार्य स्थल पर जाती हैं। तब उनका मालिक उनका साथी कर्मचारी आदि लोग यौन उत्पीड़न और मानसिक उत्पीड़न करते हैं जिससे महिलाओं को अपने जीवन में तथा समाज में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। और उन्होंने यह भी बताया कि ‘POSH’ अधिनियम आज के समय की आवश्यकता है जो महिला कर्मचारियों के कार्य स्थल पर मूल अधिकार को सुरक्षित करता है।

इस ट्रेनिंग प्रोग्राम को संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के द्वारा आयोजित किया गया। जिसमें संस्थान के सभी फैकल्टी तथा स्टॉफ मेम्बर्स उपस्थित रहे। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम की समन्वयक सह-प्राध्यापिका दीपषिखा चव्हाण रहीं। तथा आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की चेयर पर्सन डॉं. तारिका सिंह सिकरवार तथा अन्य सदस्य डॉ. चंदा गुलाटी और सह-प्राध्यापिका स्मृता भदौरिया उपस्थित रहीं।

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