मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

पेशा ए वकालत शब्दों की जादूगरी का दूसरा नाम है। वकालत के क्षेत्र में एक अंग्रेज़ी कहावत बहुत मशहूर है कि लर्न एंड अर्न। एक अच्छा अधिवक्ता न्याय पाने के लिए आखरी सांस तक प्रयास करता है। बुरहानपुर के मशहूर अधिवक्ता मनोज कुमार अग्रवाल ने शायद वकालत के उपरोक्त बुनियादी उसूलों को अपनी जिंदगी का लक्ष्य बना लिया है। बुरहानपुर के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के प्रैक्टिसिंग एडवोकेट मनोज कुमार अग्रवाल से प्राप्त जानकारी के अनुसार उनके एक निज प्रकरण में पांच जजों की बेंच के समक्ष सुनवाई हेतु याचिका कर्ता मनोज अग्रवाल की क्यूरेटिव पिटीशन/याचिका को मा. सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन पूर्व ही दि. 22.12.2023 को पंजीबद्ध करली है।
याचिकाकर्ता मनोज अग्रवाल जो अब एक शोहरत याफ़ता अधिवक्ता भी हैं, इस प्रतिनिधि को जानकारी देते हुए बताया कि अपीलीय न्यायालय/ हाई कोर्ट के आदेश दि . 30.10.2001 से निर्णित् ऋणी/नेपा लिमिटेड द्वारा न्यायालय में दि. 05.11.2001 को जमा की गई डिक्री-धन की आधी राशि जो कि डिक्रीधारी (मनोज) ने न्यायालय के आदेश अनुसार अपनी अंडरटेकिंग का बंधन देकर दि. 08.11.2001 को न्यायालय से निकाल ली थी, जिसके 11 वर्ष बाद दिनांक 02.02.2012 को निर्णित ऋणी (नेपा) की हाईकोर्ट से उक्त अपील निरस्त होने के बाद, इस उक्त आधी राशि के डिक्रीधारी (मनोज) को भुगतान की दिनांक कौन सी होगी (1) 05.11.2001 अथवा 08.11.2001 या (2) 02.02.2012। यह मामला हाईकोर्ट से मनोज अग्रवाल के पक्ष में (भुगतान की दि. 02.02.2012) निर्णीत होने के पश्चात, निर्णित ऋणी /नेपा लिमिटेड द्वारा मा. सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत अपील में मा. सुप्रीम कोर्ट की 2 सदस्यीय बेंच ने नेपा लिमिटेड/निर्णित ऋणी के पक्ष में (भुगतान की दिनांक 08.11.2001) निर्णय दि. 08.12.2022 पारित किया।
जिसके पश्चात याचिका कर्ता/मनोज अग्रवाल द्वारा मा. सुप्रीम कोर्ट की 2 सदस्यीय बेंच के इस उक्त आदेश दि. 08.12.2022 के विरुद्ध माननीय सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय बेंच के समक्ष सुनवाई हेतु प्रस्तुत क्यूरेटिव पिटीशन/याचिका को मा. सुप्रीम कोर्ट ने 2 दिन पूर्व ही दि. 22.12.2023 को पंजीबद्ध कर ली गई है। अब इस मामले को मा. सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय बेंच निर्धारित करेगी कि, अपीलीय न्यायालय के स्थगन आदेश से न्यायालय में जमा की गई आधी राशि के डिक्री धारी को भुगतान की दिनांक क्या होगी ? और तद्नानुसार किस दिनांक से इस उक्त आधी राशि पर ब्याज की गणना की जाएगी अर्थात यदि भुगतान की दिनांक 05/11/2001 / 08.11.2001 निर्धारित की जाती है तो उक्त आधी राशि पर इस दिनांक 05/11/2001/ 08.11.2001 से ब्याज देय नहीं होगा किंतु यदि भुगतान की दिनांक/निर्णित्त ऋणी की अपील निरस्त होने की दिनांक 02.02.2012 निर्धारित की जाती है, तो उक्त आधी राशि पर दिनांक 05.11.2001 / 08.11.2001 से, दि. 02.02.2012 तक का ब्याज भी देय होगा , इस बात का फैसला अब मा. सर्वोच्च न्यायालय की 5 सदस्यीय बैच करेगी।
