फैज़ान खान, गुरुग्राम/नई दिल्ली, NIT:

गत 13 नवम्बर को सोहना के सरकारी अस्पताल में घुसकर दलित परिवार पर तलवारों और फरसों से हमला करने वाले हमलावरों की गिरफ्तारी ना होने से दलित समाज में बेहद आक्रोश है। आरोप है कि पुलिस ने मामले में आईपीसी 307 नहीं लगाई है और एससी/ एसटी एक्ट की तीन धाराएं लगी होने के बावजूद आरोपियों को हिरासत में लेकर थाने से पुलिस जमानत छोड़ दिया गया। पीड़ित परिवार के लोग दिल्ली सफदरजंग और नागरिक अस्पताल गुरुग्राम में भर्ती हैं। पुलिस पर आरोपियों को संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं। उल्टा पुलिस ने पीड़ित दलित परिवार पर ही फर्जी मुकदमा दर्ज कर लिया है।

बुधवार को भीम सेना प्रमुख नवाब सतपाल तंवर सोहना की बंद कॉलोनी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। गौरतलब है कि सतपाल तंवर खुद एक जानलेवा हमले में घायल हैं। वे अस्पताल से सीधे एम्बुलेंस द्वारा पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। इस दौरान क्षेत्र के पार्षद, सरपंच, कई पंच, संघर्ष समिति के प्रधान और भीम सेना के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे। सतपाल तंवर के सोहना पहुंचने की भनक लगते ही पुलिस और सीआईडी भी मौके पर पहुंच गई थी। सतपाल तंवर ने इस दौरान फोन पर एसीपी सोहना नवीन संधू से बात की। एसीपी नवीन का रवैया पूरे तरह से गैर कानूनी और गैर जिम्मेदाराना था। भीम सेना के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष नवाब सतपाल तंवर ने पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है। तंवर ने सख्त चेतावनी भरे लहजे में एसीपी सोहना नवीन संधू को कहा कि यदि 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल नहीं भेजा गया तो पूरे सोहना में चक्का जाम कर दिया जाएगा। इस संबंध में सतपाल तंवर ने डीसीपी सिद्धांत जैन से भी बात की है। डीसीपी सिद्धांत जैन जिस वक्त महेंद्रगढ़ में एएसपी थे उस दौरान सतपाल तंवर ने पूरे महेंद्रगढ़ को बंद कर दिया था। ऐसे में पुलिस सतपाल तंवर को हल्के में लेने को कोशिश बिलकुल भी नहीं करेगी।
