अबरार अहमद खान, स्टेट ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने एक संदेश जारी करते हुऐ कहा है कि कोरोना संक्रमण में वास्तविकता को जन जन तक पहुंचाने वाले अधिमान्य प्राप्त पत्रकार वास्तव में कोरोना वॉरियर्स हैं ।जिस से गैर अधिमान्य पत्रकारों में आक्रोश का माहौल है। गैर अधिमान्य पत्रकारों का कहना है कि पत्रकार तो पत्रकार होता है वह भी इस कोरोना के विकराल संकट में जान जोखिम में डालकर खबरें जनता तक पहुंचा रहे हैं
सिर्फ अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को नहीं बल्कि सभी पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया जाए । अधिमान्यता पत्रकारों में कई तो ऐसे हैं जो स्टूडियो और कमरों में बैठ कर ख़बर बनाते हैं- यह कैसे फ्रंटलाइन वर्कर हो सकते हैं?? वहीं प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद ख़ालिद क़ैस ने सभी पत्रकारों को बधाई देते हुऐ कहा कि मुख्यमंन्त्री जी का आज प्रेस स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर यह उपहार काबिल ए तारीफ़ है।हम उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं।परंतु क्या इस आदेश से वह गैर अधिमान्य पत्रकारों के साथ कुठाराघात नही हुआ जो निःस्वार्थ भाव से फ्रंटलाइन पर पत्रकारिता की गरिमा को कायम रखने के लिए अपने प्राणों तक को दांव पर लगा रहे हैं। निःसन्देह मुख्यमंन्त्री का यह आदेश पक्षपाती है। वास्तविकता में इस कोरोना काल में यदि फ्रंटलाइन पर मौजूद है तो वह हैं गैर अधिमान्य पत्रकार, मैं इससे इंकार नही करता कि अधिमान्य पत्रकार ही इस काल में अपने दायित्व निर्वाह नहीं कर रहे, बेशक उनकी भूमिका और सहयोग से इंकार नहीं किया जा सकता है लेकिन इस आदेश से मुठ्ठी भर को खुश करके सैकड़ों के साथ कुठाराघात स्वीकार्य नहीं है।
प्रेस क्लब ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स यशस्वी मुख्यमंन्त्री शिवराज सिंह चौहान से यह अनुरोध करता है कि गैर अधिमान्य पत्रकारों के त्याग, समर्पण और सहयोग को नज़र अंदाज़ न करें। हम मांग करते हैं कि जनसम्पर्क संचालनालय में पंजीकृत वह सब पत्रकार जो गैर अधिमान्य होकर प्रिंट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए बतौर पत्रकार, फोटो ग्राफर या जिसे श्रमजीवी पत्रकार की श्रेणी में रखा गया है को भी फ्रंटलाइन वर्कर घोषित कर लाभ प्रदान किया जाए।
