गणेश मौर्य, ब्यूरो चीफ अंबेडकरनगर (यूपी), NIT:

भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष कपिल देव वर्मा इन दिनों बेशुमार सुर्खियां बटोर रहे हैं और काफी आरोपी के बावजूद अपनी वाहवाही खूब लूट रहे हैं। जैसे कहावत आपने सुनी होगी “अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना”, नेता जी अपनी कुर्सी के जश्न में शराबोर हैं और कुर्सी का बहुत ही आनंद ले रहे हैं, शायद कभी सोचा न था सत्ता धारी पार्टी की कुर्सी पर ऐसे बैठने को मिलेगा। पाँव पर पाँव धरे पचपन इंच सीना चौड़ा करके (छप्पन इंच कहने की हिम्मत कहाँ?), मुख पर इंच की जोशीली मुस्कान के साथ नेता जी कुर्सी में ऐसे धँसे हुए बैठे हैं मानो उससे चिपक ही गए हों। लोगों का कहना है कि साम दाम दंड भेद की नीति से कुर्सी मिल ही गयी, भगवान् जाने फिर यह मौका मिले या न मिले इसलिए पूरा आनंद ले रहे हैं। चर्चा है कि कुर्सी मिलते ही चमचे बरसाती मेंढक की तरह जमा होने लगे हैं, जैसे गुड़ पर मक्खी भिनभिनाती है वैसे ही हमारे नेताजी के के इर्द गिर्द यह भिनभिना रहे हैं। नेताजी को भारतीय जनता पार्टी के सिद्धांतों का थोड़ा भी ख्याल नहीं है, संगठन भाड़ में जाए! दूसरी तरफ पार्टी आलाकमान के निर्देश पर 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी अच्छे रिजल्ट का इंतजार कर रही है, इधर संगठन ही अच्छी तरह मजबूत नहीं है। जिला अध्यक्ष के खिलाफ ही संगठन के कार्यकर्ता तरह तरह की बात कर रहे हैं तो जनता कहां चूकने वाली है!
भारतीय जनता पार्टी के सांसद हरिओम पांडे ने डंके की चोट पर कहा कि सपा की गोद में बैठने वाला नेता सपा की जी हजूरी करने वाले नेता पर विश्वास करना तो भाजपा के लिए घातक होगा। 23 अक्टूबर 2018 समीक्षा बैठक क्षेत्रीय कार्यालय पर बुलाई गई थी जिसमें आपेक्षित मात्रा में बूथ गठन पूरा ना होने पर जिला अध्यक्ष को क्षेत्रीय नेतृत्व की फटकार मिली क्योंकि जब से कपिल देव वर्मा अध्यक्ष बने है तब से नेतृत्व को झूठे आंकड़े भेज कर प्रदेश में अपनी वाहवाही लूटते आ रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि नेता जी पार्टी को मजबूत करने की बजाए पार्टी को कमजोर करने में लगे हुए हैं। जिला अध्यक्ष कपिल देव वर्मा हमेशा चर्चा में रहते हैं, टेलीफोन ना उठाना, कार्यकर्ताओं से बात ना करना उनकी आदत में शुमार है। चर्चा है कि अधिकारियों से भी उनके द्वारा सत्ता की हनक में बेरूखी से बात की जाती है जिसके चलते जनता, कार्यकर्ता तथा प्रशासन में उनके क्रियाकलापों को लेकर चर्चाएं शबाब पर हैं।
