कृषि विज्ञान केन्द्र की सलाहकार समिति की बैठक संपन्न, किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने पर ज़ोर | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

कृषि विज्ञान केन्द्र, बुरहानपुर की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक गत दिवस संपन्न हुई। बैठक में किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा खेती की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए विभिन्न विभागों और कृषि विज्ञान केन्द्र के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने पर चर्चा की गई। बैठक में कहा गया कि जिले में कृषि क्षेत्र के विकास की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें नवीन तकनीकों और कृषि विविधीकरण के माध्यम से साकार किया जा सकता है।

बैठक में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से अवगत कराने तथा उन्हें पारंपरिक खेती के साथ-साथ कृषि विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया। इस दौरान समिति के सदस्यों ने कृषि विकास, किसानों की आय में वृद्धि और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के संबंध में अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए।

बैठक में कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी उपस्थितजनों को दी गई। साथ ही केले की गुणवत्ता में सुधार, औषधीय फसलों को बढ़ावा देने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, जल संरक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन, फसल विविधीकरण तथा पशुपालन को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इन प्रयासों के माध्यम से किसानों तक नई तकनीकों का लाभ पहुंचाने और कृषि क्षेत्र को अधिक उन्नत बनाने की दिशा में कार्य करने पर चर्चा हुई।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र, सांडसकला में नवीन उर्वरक एवं बीज विक्रय केन्द्र का उद्घाटन भी किया गया। इस पहल को किसानों को कृषि संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बैठक में कृषि विज्ञान केन्द्र के अध्यक्ष श्री हमीद काजी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं केन्द्र प्रमुख डॉ. संदीप कुमार सिंह, अटारी जबलपुर के वैज्ञानिक डॉ. हरीष, आगा खान फाउंडेशन एवं इफको के प्रतिनिधियों सहित प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे। इसके अलावा एलडीएम श्री अक्षय शर्मा, कृषि विज्ञान केन्द्र के अन्य वैज्ञानिकों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भी बैठक में सहभागिता की।

बैठक में कृषि विकास के लिए विभागीय समन्वय, वैज्ञानिक पद्धतियों के प्रसार और किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही कृषि विविधीकरण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया गया।

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