अली अब्बास, ब्यूरो चीफ, मथुरा (यूपी), NIT:

वात्सल्य ग्राम स्थित समविद् गुरुकुलम के प्रांगण में दशहरा मेला धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अहंकारी रावण का 40 फीट ऊंचा पुतला तैयार किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पद्म विभूषित साध्वी ऋतंभरा ने प्रभु श्रीराम के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस अवसर पर समविद् गुरुकुलम की छात्राओं ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया। ‘धर्मस्य जयः, अधर्मस्य क्षयः’ की अवधारणा को केंद्र में रखते हुए चारों युगों की घटनाओं का संक्षिप्त मंचन किया गया। छात्राओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया और पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम में प्रभु श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का सजीव मंचन किया गया। अंततः धर्म की विजय हुई और रावण के पुतले का दहन किया गया। इसके बाद साध्वी ऋतंभरा ने प्रभु श्रीराम का राज्याभिषेक करते हुए मर्यादा, संयम और धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि जब हम मर्यादा की रेखा लांघते हैं, तभी से हमारा पतन शुरू हो जाता है। इसके विपरीत, मर्यादित जीवन जीने वाले व्यक्ति की सदैव विजय होती है। जहां धर्म होता है, वहां विजय निश्चित होती है। यदि हम धर्म के मार्ग पर चलें, तो कोई भी बाधा हमारा रास्ता नहीं रोक सकती। इतिहास साक्षी है कि धर्म के लिए संघर्ष करने वालों को अंततः विजय प्राप्त हुई है।
साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि अहंकारी रावण के पास मायावी रथ था, जबकि प्रभु श्रीराम के पास धर्म का रथ था, जिसके पहिए संयम और घोड़े साहस के प्रतीक थे। इसी धर्मबल के आधार पर श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त कर लंका पर जीत हासिल की।
सांस्कृतिक मंचन में कुमारी रचि ने श्रीराम, अक्षिता ने सीता, भव्या ने लक्ष्मण, गौरी ने भरत, श्रेया ने शत्रुघ्न और वैष्णवी ने हनुमान की भूमिका निभाई। सभी छात्राओं ने अपने अभिनय से दर्शकों की सराहना प्राप्त की।
कार्यक्रम में संजय भैया, स्वामी सत्यशील, समविद् की डायरेक्टर सुमन लता, पूर्व आईजी एच.के. शर्मा, साध्वी शिरोमणि, साध्वी सत्यश्रुति, साध्वी सत्यनिष्ठा तथा गोकुलम की माताएं उपस्थित रहीं। उपप्रधानाचार्या श्रीमती पूजा सिंह ने आभार व्यक्त किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन धनंजय मिश्रा ने किया।

