अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

यौन शोषण और महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में इलाहाबाद में फ्रीडम मार्च का आयोजन किया गया। महिला छात्रावास गेट, लल्ला चुंगी से शुरू हुआ मार्च चंद्रशेखर आजाद प्रतिमा, कंपनी गार्डन तक पहुंचा। मार्च में बड़ी संख्या में छात्राओं, छात्रों और नागरिक समाज के लोगों ने हिस्सा लिया।
फ्रीडम मार्च की संयोजक एवं शोध छात्रा सोनाली ने कहा कि लंबे समय से हाशिए पर रखी गई आधी आबादी अब अपने अधिकारों और सम्मान के लिए सड़कों पर उतर रही है। उन्होंने कहा कि मणिपुर से लेकर दिल्ली, वाराणसी, महाराष्ट्र, जयपुर और देश के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के विरोध में आवाज उठाई जा रही है। इलाहाबाद में भी यौन शोषण और पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ यह प्रतिरोध जारी रहेगा।

कीर्ति ने कहा कि यह केवल एक दिन का मार्च नहीं, बल्कि महिलाओं की रोजमर्रा की आजादी और सम्मान की लड़ाई है। छात्रावासों में समय की पाबंदी से लेकर कक्षाओं में महिलाओं को घूरने वाली नजरों तक, कई तरह की बंदिशें उनकी स्वतंत्रता को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं इन सीमाओं को तोड़कर बेखौफ और स्वतंत्र जीवन जीने के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।
साक्षी ने कहा कि मणिपुर की घटनाओं का सवाल केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं के प्रति हिंसा और उनके शरीर को युद्ध एवं हिंसा के साधन के रूप में देखने वाली मानसिकता के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी स्वतंत्र पहचान और सम्मान के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।
फ्रीडम मार्च और सभा का संचालन सोनाली ने किया। आयोजन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के साथ नागरिक समाज के लोग शामिल हुए।

