नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र में सुखे का असर गहरा होता जा रहा है। 2014 से अब तक राज्य का जल संपदा मंत्रालय बुरी तरह से फेल साबित हो चुका है। महाराष्ट्र सरकार के एक लाख करोड़ रुपए के राजकोषीय घाटे में 20 हजार करोड़ का योगदान अकेले जल संपदा मंत्रालय का है। वाघूर लिफ्ट इरिगेशन योजना अंतर्गत कृषि तालाबों के निर्माण का सैकड़ों करोड़ रुपए का बिल रोकने की मांग किसानों की ओर से की जा रही है। इसी पैसे को अकाल निवारण के लिए खर्च किए जाने की आवश्यकता है। तालाबों के टेस्टिंग के अभाव से GVPR इंजीनियरिंग कंपनी के काम की गुणवत्ता संदेह के घेरे में है।

सोर्स बताते हैं कि कंपनी के अंदरूनी मामलों में कंपनी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लोकल स्टाफ का आर्थिक रूप से शोषण किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को लेकर चुनिंदा फिरौतीबाज लोगों की ओर से सुचना अधिकार का किया जा रहा प्रयोग बेनतीजा क्यों है? इस सवाल ने जानकारों को परेशान कर रखा है। प्रोजेक्ट्स से संबंधित सरकारी मेजरमेंट बुक और लोकेशन टैगिंग डेटा सार्वजनिक कर दिया गया तो वाघूर में चल रहा एक बड़ा घोटाला आसानी से पकड़ा जा सकता है।
जलगांव जिले में तापी पाटबंधारे विकास निगम ने बीते 35 सालों में सैकड़ों अफ़सरों को मालामाल और नेताओं को धन कुबेर कर दिया है। तुकाराम मुंढे से आपदा प्रबंधन विभाग का कार्यभार नहीं छीना जाता तो महाराष्ट्र में पड़े सुखे का बेहतर तरीके से प्रबंधन किया जा सकता और जल संपदा विभाग के ऑडिट का प्रावधान भी अमल में आता।

