साक्ष्यों में विरोधाभास और अभियोजन की कमजोर पैरवी के चलते तौसीफ अंसारी दोषमुक्त, अधिवक्ता शोएब अहमद की प्रभावी पैरवी | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

न्यायालय में किसी मुकदमे की पैरवी केवल कानून की धाराओं को प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि साक्ष्यों की गहराई से पड़ताल, गवाहों के बयानों का सूक्ष्म विश्लेषण और तथ्यों को न्यायिक दृष्टिकोण से प्रभावी ढंग से रखने की कला भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बुरहानपुर के युवा अधिवक्ता शोएब अहमद ने एक महत्वपूर्ण प्रकरण में अपनी कानूनी सूझबूझ, प्रभावी प्रतिपरीक्षण और सशक्त बचाव पक्ष की पैरवी के माध्यम से अपनी कानूनी दक्षता का परिचय दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विशेष सत्र न्यायालय (पॉक्सो एक्ट), बुरहानपुर के विद्वान न्यायाधीश माननीय श्री इंदुकांत तिवारी ने 26 सितंबर 2026 को पारित अपने निर्णय में युवा अधिवक्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता उबैद शेख के भतीजे शोएब अहमद की सशक्त पैरवी के बाद उनके मुवक्किल मोहम्मद तौसीफ अंसारी को उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल नहीं रहा।

क्या था पूरा मामला?

प्रकरण के तथ्यों के अनुसार, मोमिनपुरा, बुरहानपुर निवासी मोहम्मद तौसीफ अंसारी के विरुद्ध 23 जुलाई 2024 को थाना सिटी कोतवाली, बुरहानपुर में स्वीपर कॉलोनी, हरीरपुरा, बुरहानपुर निवासी 17 वर्षीय किशोरी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, 7 जुलाई 2024 को दोपहर के समय जब वह घर पर अकेली थी, तब आरोपी उसकी मौसी के घर आया और रजिस्ट्री के दस्तावेज मांगने के बहाने उसका हाथ पकड़कर अभद्रता की। शिकायत में अश्लील एवं जातिसूचक गालियां देने के आरोप भी लगाए गए थे।

सिटी कोतवाली, बुरहानपुर में अपराध क्रमांक 251/2024 तथा केस नंबर SCATR 30/2024 के तहत भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो अधिनियम एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया, जिसके बाद न्यायालय में विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए गए।

प्रतिपरीक्षण में सामने आए महत्वपूर्ण तथ्य

आरोपी की ओर से युवा अधिवक्ता शोएब अहमद ने प्रकरण में प्रभावी पैरवी करते हुए गवाहों का प्रतिपरीक्षण किया। न्यायालय में पीड़िता, उसकी मौसी, नानी, विद्यालय की प्राचार्य, विवेचना अधिकारी तथा प्राथमिकी दर्ज करने वाले अधिकारी के बयान दर्ज किए गए।

बचाव पक्ष ने प्रतिपरीक्षण के दौरान साक्षियों के बयानों में मौजूद विरोधाभासों और प्रकरण की पृष्ठभूमि से जुड़े तथ्यों को न्यायालय के समक्ष रखा। पैरवी के दौरान यह तथ्य भी सामने रखा गया कि आरोपी और पीड़िता के परिवार के बीच उधार की रकम को लेकर पुरानी रंजिश थी। आरोपी द्वारा पीड़िता की शिकायत दर्ज होने से पहले ही उसकी मौसी एवं परिवार के अन्य सदस्यों के विरुद्ध थाना कोतवाली तथा गणपति नाका थाने में लिखित शिकायत दिए जाने की बात भी न्यायालय के संज्ञान में लाई गई।

बचाव पक्ष की ओर से प्रतिरक्षा साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए, जिनका न्यायालय ने परीक्षण किया। अधिवक्ता ने पीड़िता की प्रारंभिक रिपोर्ट और न्यायालय में दिए गए बयानों के बीच मौजूद विरोधाभासों की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया।

न्यायालय ने साक्ष्यों का किया सूक्ष्म विश्लेषण

प्रकरण में प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने अभियोजन के मामले को संदेह से परे प्रमाणित नहीं पाया। अभियोजन पक्ष पीड़िता की नाबालिग आयु को भी न्यायालय के समक्ष पर्याप्त रूप से प्रमाणित नहीं कर सका। न्यायालय द्वारा पीड़िता की आयु को नाबालिग के रूप में प्रमाणित नहीं माना गया।

सभी तथ्यों, साक्ष्यों और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करने के पश्चात न्यायालय ने आरोपी मोहम्मद तौसीफ अंसारी को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।

कानूनी दक्षता और अनुभव का मिला परिचय

अधिवक्ता शोएब अहमद जिले के वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित अधिवक्ता उबैद शेख के भतीजे हैं। युवा अधिवक्ता के रूप में वे अपनी कानूनी समझ और प्रभावी पैरवी के जरिए अपनी पहचान बना रहे हैं। प्रस्तुत प्रकरण में साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल, गवाहों के प्रतिपरीक्षण और न्यायालय के समक्ष तथ्यों को क्रमबद्ध ढंग से रखने की उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही।

कानून की जटिलताओं को समझना, साक्ष्यों की कसौटी पर अभियोजन के दावों को परखना और मुवक्किल के पक्ष को विधिसम्मत तरीके से प्रस्तुत करना एक कुशल अधिवक्ता की महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं। इस प्रकरण में बचाव पक्ष की पैरवी ने यह रेखांकित किया कि न्यायिक प्रक्रिया में प्रत्येक आरोप का प्रमाणित होना आवश्यक है और दोषसिद्धि का आधार केवल आरोप नहीं, बल्कि विश्वसनीय एवं ठोस साक्ष्य होते हैं।

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