चार माह से मध्यान्ह भोजन की राशि नहीं मिलने से परेशान समूह की महिलाएं, कलेक्टर को सौंपा 12 सूत्री मांगों का ज्ञापन | New India Times

पंकज शर्मा, ब्यूरो चीफ, धार (म.प्र.), NIT:

चार माह से मध्यान्ह भोजन की राशि नहीं मिलने से परेशान समूह की महिलाएं, कलेक्टर को सौंपा 12 सूत्री मांगों का ज्ञापन | New India Times

आज मध्यान्ह भोजन, रसोइयों एवं साझा चूल्हा संचालित समूह की महिलाओं ने धार नारी शक्ति विकास महिला मंडल महासंघ के अध्यक्ष प्रतिनिधि बालाराम चौहान के नेतृत्व में धार जनसुनवाई में कलेक्टर महोदय को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से समूह की महिलाओं ने अपनी विभिन्न समस्याओं से अवगत करवाया।

चार माह से मध्यान्ह भोजन की राशि नहीं मिलने से परेशान समूह की महिलाएं, कलेक्टर को सौंपा 12 सूत्री मांगों का ज्ञापन | New India Times

मध्यान्ह भोजन एवं साझा चूल्हा संचालन करने वाले समूह की बहनों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पिछले चार माह से न तो मध्यान्ह भोजन की राशि जमा हुई है, न रसोइया बहनों की राशि जमा हुई है और न ही साझा चूल्हे की राशि समय पर जमा हो रही है। वहीं, टीएचआर वितरण का जो काम समूह को दिया गया है, उसमें भी समय पर खाद्यान्न नहीं मिल रहा है और जो खाद्यान्न मिल रहा है, वह भी कम मात्रा में दिया जा रहा है।

किराने के सामान के दाम आज कई गुना बढ़ चुके हैं। जैसे तेल करीब 150 रुपये, शक्कर 70 रुपये प्रति किलो और दाल करीब 150 रुपये प्रति किलो है, जबकि मध्यान्ह भोजन संचालकों को अभी भी पुराने रेट के हिसाब से राशि दी जा रही है।

ऐसी स्थिति में समूह संचालकों को बच्चों को भोजन परोसने में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दुकानदारों ने भी अब उधार में किराने का सामान देने से मना कर दिया है। कई माता-बहनें अपने गहने गिरवी रखकर मध्यान्ह भोजन का संचालन कर रही हैं। वहीं अधिकारियों का दबाव भी बना रहता है। मीनू के अनुसार भोजन देने के साथ टिफिन भी रखे जा रहे हैं, जिससे मानसिक तनाव बढ़ रहा है और भोजन बनाते समय उनके साथ अनहोनी घटनाएं भी घटित हो रही हैं।

कई समूह संचालक ऐसे हैं, जिनकी रसोइयों की राशि, मध्यान्ह भोजन की राशि एवं साझा चूल्हे की राशि जमा नहीं हो पा रही है। वहीं समय पर गेहूं और चावल भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।

समूह की 12 सूत्री मांगें एवं समस्याएं इस प्रकार हैं—

1. मध्यान्ह भोजन और साझा चूल्हे की राशि हर महीने समय पर जमा की जाए।

2. मध्यान्ह भोजन की राशि बढ़ाकर मिडिल स्कूल में 15 रुपये तथा प्राथमिक स्कूल में 10 रुपये प्रति बच्चे की जाए।

3. मिडिल स्कूल में खाद्यान्न की मात्रा बढ़ाकर प्रति बच्चा 200 ग्राम तथा प्राथमिक स्कूल में 150 ग्राम की जाए।

4. मध्यान्ह भोजन रसोइया बहनों को स्थायी किया जाए तथा मानदेय 4,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया जाए।

5. मध्यान्ह भोजन संचालन के दौरान रसोइया बहनों के साथ कोई घटना घटित होने पर शासन द्वारा निःशुल्क इलाज की व्यवस्था की जाए तथा मृत्यु होने पर परिवार को 5 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाए।

6. साझा चूल्हे में रसोइया बहनों की राशि 500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये की जाए।

7. रसोई गैस की दरें अधिक बढ़ जाने से समूह की बहनों को भोजन बनाने में अधिक खर्च हो रहा है। इसलिए उन्हें कम दर पर गैस सिलेंडर उपलब्ध करवाया जाए।

8. समूह संचालकों को मध्यान्ह भोजन और साझा चूल्हे का गेहूं-चावल सोसायटी/कंट्रोल की दुकान से मशीन द्वारा दिया जाता है। मशीन में सेल्समैन के अंगूठे से भी गेहूं-चावल निकाले जाने की व्यवस्था है, जिसमें कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। सेल्समैन खाद्यान्न निकाल लेते हैं और जब समूह की महिलाएं खाद्यान्न लेने जाती हैं तो उन्हें बताया जाता है कि उनका खाद्यान्न अभी नहीं आया है या मशीन में उसका रिकॉर्ड नहीं हो रहा है। इसलिए मशीन से सेल्समैन के अंगूठे की व्यवस्था हटाई जाए।

9. स्कूलों और आंगनबाड़ियों में होने वाले निर्माण कार्य, भवन, शौचालय, बाउंड्रीवॉल एवं पुताई आदि के कार्य समूह को दिए जाएं, जिससे काम गुणवत्तापूर्ण होने के साथ-साथ समूह से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

10. समूह संचालकों को शासन द्वारा समय-समय पर विशेष भोजन के आदेश दिए जाते हैं, जैसे चुनाव के दौरान भोजन उपलब्ध कराना, राजनीतिक कार्यक्रमों अथवा महापुरुषों के कार्यक्रमों में भोजन के पैकेट तैयार करके पहुंचाना। इन कार्यों की राशि आज दिनांक तक जमा नहीं हुई है।

11. जून माह में स्कूल 15 जून से खुलने के बाद समूह द्वारा बच्चों को विशेष भोज एवं भोजन देना शुरू कर दिया जाता है, लेकिन उसकी राशि जमा नहीं होती है। साथ ही रसोइया बहनों के 15 दिन के मानदेय की राशि भी जमा नहीं होती है।

12. जब समूह द्वारा मीनू के अनुसार भोजन दिया जा रहा है तो मीनू के अनुसार निर्धारित राशि भी दी जानी चाहिए।

अतः श्रीमान से निवेदन है कि हमारी समस्याओं का जल्द निराकरण किया जाए। यदि समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो प्रदेशभर में मध्यान्ह भोजन एवं साझा चूल्हा संचालित करने वाले समूहों की महिलाएं भूख हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगी।

By nit

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