अफसर के घर चोरी में पुलिस की फुर्ती, आम नागरिक के मामले में सुस्ती क्यों? पुलिस आयुक्त से सीधा सवाल | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

पत्रकार की भाभी नाज़िया खान की बाइट

राजधानी भोपाल में चोरी की वारदात की जांच को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बीते दिनों एक तरफ पुलिस अधिकारी के घर हुई चोरी में पुलिस ने दिन-रात एक कर 1500 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाले, राजस्थान तक दबिश दी और महज 10 दिन में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर ₹71 लाख का माल बरामद करने का दावा किया, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिक के घर से चोरी हुए सोने-चांदी के आभूषणों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी अब भी इंतजार में है।

गौतम नगर थाना क्षेत्र के शारदा नगर, नारियल खेड़ा निवासी न्यू इंडिया टाइम्स के रिपोर्टर मोहम्मद मुकीज खान ने 29 सितंबर 2026 को पुलिस आयुक्त भोपाल को आवेदन देकर मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

अफसर के घर चोरी में पुलिस की फुर्ती, आम नागरिक के मामले में सुस्ती क्यों? पुलिस आयुक्त से सीधा सवाल | New India Times

शिकायतकर्ता के अनुसार उनके घर से सोने-चांदी के आभूषण चोरी हुए थे। घटना की सूचना गौतम नगर थाना पुलिस को दी गई और एफआईआर भी दर्ज हुई, लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद अब तक चोरी का खुलासा नहीं हो सका है और न ही चोरी गया सामान बरामद हुआ है।

पत्रकार के भाई मुजीब खान की बाइट

आवेदन में पुलिस आयुक्त से मांग की गई है कि आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को गंभीरता से खंगाला जाए, घटना के दौरान इलाके में आने-जाने वाले संदिग्धों की पहचान की जाए और चोरी के सामान की संभावित खरीद-फरोख्त करने वालों तक पुलिस पहुंचे। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि
जब एक पुलिस अधिकारी के घर चोरी होती है तो जांच में तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल, सीसीटीवी की व्यापक जांच और दूसरे राज्यों तक पुलिस टीम भेजकर कार्रवाई संभव है, तो आम नागरिक के घर चोरी होने पर इसी तरह की तत्परता क्यों नहीं दिखाई जाती?

शिकायतकर्ता ने पुलिस आयुक्त से मांग की है कि उसके मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी जांच के निर्देश दिए जाएं। सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की जाए तथा चोरी गए सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए जाएं।

मामला अब सिर्फ चोरी के खुलासे का नहीं, बल्कि पुलिस की जांच व्यवस्था में आम और खास के लिए कार्रवाई की रफ्तार को लेकर उठ रहे सवाल का भी है।

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