मक़सूद अली, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:
शासकीय आदिवासी छात्रावास में सर्पदंश से एक आदिवासी छात्रा की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना को लेकर शामा दादा कोलाम ब्रिगेड ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। ब्रिगेड की प्रदेश अध्यक्ष इंदिरा बोंदरे ने सवाल उठाया कि एक आदिवासी बेटी के जीवन की कीमत महज चार लाख रुपये कैसे तय की जा सकती है?
इंदिरा बोंदरे ने आरोप लगाया कि सरकारी छात्रावासों में रहने वाले आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की है। इसके बावजूद कई छात्रावासों में प्राथमिक उपचार तथा सर्पदंश जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की कथित लापरवाही के कारण एक गरीब आदिवासी परिवार ने अपनी बेटी को खो दिया।
ब्रिगेड ने छात्रावास अधीक्षक और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने तथा उनके खिलाफ सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज करने की मांग की है। साथ ही मृत छात्रा के परिवार को चार लाख रुपये की सहायता के बजाय 50 लाख रुपये का मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की गई है।
सभी आदिवासी छात्रावासों का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग
इंदिरा बोंदरे ने राज्य के सभी आदिवासी छात्रावासों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की। उन्होंने छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, स्वच्छता सुनिश्चित करने, प्राथमिक उपचार की पर्याप्त व्यवस्था करने तथा आपात स्थिति में 24 घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शामा दादा कोलाम ब्रिगेड इस मामले में चुप नहीं बैठेगी। यदि सरकार ने मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लिया तो राज्यभर में आंदोलन किया जाएगा। बोंदरे ने चेतावनी दी कि मांगों को लेकर आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी जिम्मेदारी शासन की होगी।

