नंदुरबार में फर्जी रजिस्ट्रेशन से शासन को लगा 66 लाख का चूना, 88 वाहनों का किया गया फर्जी रजिस्ट्रेशन, आवंटित किए गए वीआईपी नंबर | New India Times

अब्दुल वाहिद काकर, नंदुरबार/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

नंदुरबार में फर्जी रजिस्ट्रेशन से शासन को लगा 66 लाख का चूना, 88 वाहनों का किया गया फर्जी रजिस्ट्रेशन, आवंटित किए गए वीआईपी नंबर | New India Times

परिवहन कार्यालय धुलिया, नंदुरबार और जलगांव में
फर्जीवाड़े का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को दैनिक समाचार पत्र नवभारत ने फर्जी रजिस्ट्रेशन का
फंडाफोड़ किया था. जिसके चलते नंदुरबार उप प्रादेशिक कार्यालय ने देर शाम दो दलालों के खिलाफ सायबर पुलिस में मामला दर्ज कराया है और इस फर्जीवाड़े में शामिल लिपिक उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी और सहायक उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी को क्लीन चिट देकर निजी व्यक्तियों पर गाज गिराई गई है जबकि अधिकारियों की मूक सहमति से ही यह संभव हुआ है. इस मामले में डिप्टी आरटीओ बीडकर तथा एआरटीओ जाधव भी जिम्मेदार हैं लेकिन लिपिकों के साथ उन्हें भी बचाने की कवायद किये जाने का आरोप समाजवादी पार्टी के प्रदेश महा सचिव राउफ शेख ने लगाया है।

गौरतलब है कि इस मामले में जिस लिपिक का लॉगिन इस्तेमाल किया गया है उसी ने सरकार के 66 लाख रुपये राजस्व को चूना लगाया जाने की शिकायत दर्ज कराई है. इस मामले की उच्च स्तरीय जांच निष्पक्ष कराई जाने की मांग नागरिकों द्वारा उठाई जा रही है।

नंदुरबार उप प्रादेशिक परिवहन कार्यालय एक बार फिर विवादों में है। इस बार वीआईपी नंबरों का फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसमें 83 वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराने की शिकायत परिवहन विभाग ने की है. हमेशा की भांति इस बार भी परिवहन विभाग ने बड़े अधिकारियों को बचाने की कवायद शुरू कर दी है और निजी एजेंटों को बलि का बकरा बना कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया है जबकि इस पूरे कांड की जिम्मेदारी प्रादेशिक परिवहन अधिकारी किरण बिड़कर और आरटीओ उत्तम जाधव की है। दोनों अधिकारियों के संज्ञान के बिना परिवहन पोर्टल पर जानकारी अपडेट करना संभव नहीं है इसके बावजूद संबंधित दोषियों को बचाने में धुलिया परिवहन अधिकारी लगे हुए हैं.

शिकायत में बताया गया है कि आरटीओ एजेंट ने नंदुरबार परिवहन कार्यालय कि साइट को हैक कर सरकार के लाखों रुपये राजस्व का नुकसान करते हुए एक नहीं 83 वाहनों का फर्जी रजिस्ट्रेशन कर वीआईपी नंबर आवंटन किए हैं जबकि नियमानुसार वीआईपी नंबर शासकीय शुल्क का भुगतान करने के बाद ही आवंटन किया जाता है इसके बावजूद यह गोरख कारोबार एआरटीओ उत्तम जाधव और डिप्टी आरटीओ किरण बीडकरर की निगाहों के नीचे अंजाम दिया गया है. सूत्रों की मानें तो इस सक्रिय सिंडिकेट में यह दोनों अधिकारी लिप्त बताए जा रहे हैं. लेकिन एफआईआर में मुख्य आरोपी निजी दलाल सलीम खान और इमरान सैय्यद को बलि का बकरा बनाया गया है।

आरटीओ विभाग की साइट अगर हैक कर ली गई तो इसकी जानकारी संबंधित व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर मैसेज आता है कि आपकी लॉगिन आईडी का किसी ने उपयोग किया है और साथ ही सूत्रों ने बताया है कि लॉगइन करते समय संबंधित व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर ओटीपी का संदेश आता है इसके बाद ही आईडी लॉगिंग होती है किंतु नंदुरबार आरटीओ ऑफिस में 83 बार परिवहन विभाग की अधिकृत साइट को खोला गया जिसमें फर्जीवाड़ा का रजिस्ट्रेशन किया गया एक बार भी डिप्टी आरटीओ बीडकर तथा एआरटीओ उत्तम जाधव को पता नहीं लगा इस पर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है.

परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि इस मामले में साइबर क्राइम निष्पक्ष जांच करेगी तो परिवहन विभाग की परिवहन सेवा साइट को लॉगिंग करते समय किस के मोबाइल नंबर पर ओटीपी गया था और किस स्थान से किस आईपी एड्रेस से फर्जी रजिस्ट्रेशन किया गया इसकी पूरी जानकारी उजागर हो जाएगी. इसी तरह आरसी बुक भी नंदुरबार कार्यालय में प्रिंट की गई हैं। शासन सीरियल नंबरों के अनुसार आरसी बुक प्रिंट करने जारी करता है यदि इसकी जांच की गई तो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा होगा.

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