मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

विकासखंड में शिक्षकों को उनके शालेय उपयोग हेतु टैबलेट खरीदनें शासन द्वारा राशि खातों में डाली गई, शिक्षकों को अपनी पसंद के टैबलेट अपनी पसंद की दुकान से खरीदना था, परंतु विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को एक ही दुकान से टैबलेट खरीदने के लिए भारी दबाव तो बनाया ही गया साथ ही घटिया क्वालिटी के टैबलेट दुकानदार से सांठ -गांठ कर सप्लाई करा दिए गए हैं। आलम यह कि जांच की जाए तोअधिकतर शिक्षकों का लॉगिन एक ही डिवाइस से किया हुआ मिलेगा। स्थानीय नागरिकों ने इस मामले में जांच की मांग प्रशासन के सम्मुख की है वहीं अगर यह जांच पूरी ईमानदारी से करी जाती है तो कुछ शिक्षक जो दोनों सरकारों में मलाई खाते हैं साथ ही कार्यालय में बैठकर यह सब उल्टा सीधा करते रहते हैं नप जाएंगे। वहीं भ्रष्टाचार का आलम इस कदर मचा हुआ है कि इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों पर झूठे मामले बनवाने की साजिशें की जाने लगी हैं। शिक्षा मित्र पोर्टल पर एक ही डिवाइस से इतने दूरस्थ शिक्षकों का लॉगिन मात्र जांच लिया जाए की कैसे हुआ तो आधी जांच तथा कार्यवाही करने का आधार स्वयं पूरा हो जाएगा। शिक्षकों से राशि पूरी लेकर तथा कइयों से तय से अधिक राशि लेकर घटिया क्वालिटी का टैबलेट पकड़ाकर चलता किया गया है वहीं सूत्रों की माने तो सप्लायर किसी संगठन के एक जिला पदाधिकारी से बहुत मुंहलगा होने के कारण तथा सत्ताधारी दल के एक नेता का कमीशन सेट होने के कारण ऐसे कामों को आसानी से प्रशासन पर दबाव बनाकर तथा मिलीभगत करके किया करता है पूर्व में भी उक्त सप्लायर द्वारा फर्नीचर, स्वच्छता सामग्री इत्यादि में जमकर गोलमाल की खबरें आम हैं वहीं जनचर्चा का विषय तो यह है कि अनुशासित संगठन के नाम का इतना खुल्ला दुरुपयोग होने के बाद भी इस संगठन के लोग मौन साधे हुए हैं?
