गुलशन परूथी, ओरछा/निवारी (मप्र), NIT:

भगवान श्री राजाराम की धार्मिक नगरी ओरछा पूरी तरह राममय हो गई। रामनवमी पर श्री राम जन्मोत्सव को भव्यता और पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के साथ मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में मनाया गया। ओरछा में रामनवमी को गौरव दिवस के रूप में मनाया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ओरछा स्थित ऐतिहासिक श्री राजाराम मंदिर में राम भक्तों और श्रद्धालुओं के साथ दीप प्रज्वलित कर श्री राम जन्मोत्सव को पूरी आस्था व विश्वास के साथ मनाया। भगवान श्री राम के आदर्श स्वरूप और प्रेरणादाई व्यक्तित्व के अनुरूप राम जन्मोत्सव में दूर- दूर से आये श्रद्धालुओं ने पूरी गरिमा और विश्वास के साथ शामिल हुए। श्री चौहान द्वारा श्री राजाराम मंदिर में राम जन्मोत्सव का पहला दीपक प्रस्तुत करने के साथ ही कंचना घाट और अन्य क्षेत्रों में एक साथ 5 मिनट के भीतर 5 लाख दीप प्रज्वलित हो उठे और आतिशबाजी के साथ ही पूरे ओरछा में दीपोत्सव का अद्भुत नजारा को देखने को मिला।
ओरछा में बने भव्य व ऐतिहासिक दीपोत्सव के लिए मंदिर प्रबंधन ने 5 लाख दीपक जलाने के लिए 2200 पेटियों में झांसी से मिट्टी के विशेष दीपक मंगवाए थे। प्रत्येक पेटी में 265 दीपक रखे गए थे। 10 हजार दीपक बेतवा नदी में प्रज्ज्वलित कर प्रवाहित करने के लिए अलग से मंगवाए गए थे। हर पेटी के साथ 4 लीटर तेल की व्यवस्था भी की गई थी। पांच लाख दीप जलाने के लिए 8800 लीटर तेल का उपयोग किया गया। इस पूरे आयोजन में श्री राम राजा मंदिर प्रबंधन की ओर से लगभग ₹30 लाख की राशि व्यय की गई। श्री राजाराम मंदिर के प्रांगण, बेतवा नदी के अलावा मंदिर के आसपास के क्षेत्र में 5 स्थानों के लिए दीपोत्सव के काम आने वाली सभी सामग्री का इंतजाम इन स्थानों पर पहले से कर दिया गया था। रात पौने आठ बजे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पहला दीप जलाते ही 5 मिनट के अंदर की शासकीय, समाजसेवी संस्थाओं के लोगों तथा हजारों श्रद्धालुओं ने 5 मिनिट में दीप प्रज्जवलित किये। राम भक्तों द्वारा दीपोत्सव का यह अद्भुत नजारा दिखाने के लिए नगर के पांच प्रमुख स्थानों पर एलसीडी से लाइव प्रसारण भी किया गया। इस मौके पर नगर के चार स्थानों पर शानदार आतिशबाजी का प्रदर्शन भी किया गया। धार्मिक नगरी ओरछा में पहली बार मनाए गए दीपोत्सव को लेकर शहरवासियों तथा दूर-दूर से आए बड़ी संख्या में रामभक्त और अन्य श्रद्धालुओं में भारी उत्साह था। जैसे जैसे शाम होती गई श्रद्धालुओं का ओरछा पहुंचना शुरू हो गया था।
