रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

अल्लाह के फज़्ल-ओ-करम और नबी-ए-पाक ﷺ के सदके उमरा की मुबारक ज़ियारत के लिए झालोद से जनाब बशीर भाई सय्यद, रज़िया बेन सय्यद, जनाब लियाकत सय्यद, नाहेदा सय्यद, अलफेज सय्यद और तनवीर सय्यद अहमदाबाद एयरपोर्ट से मक्का-मदीना की जियारत के लिए रवाना हुए।

यहाँ मौजूद सभी लोगों ने उमरा पर जाने वालों से गुज़ारिश की कि मुल्क की अमन-ओ-अमान, भाईचारे और तरक्की के लिए खास दुआ फरमाएँ। जनाब लियाकत सय्यद ने बताया कि वहाँ पहुँचकर वह हमारे मुल्क भारत के लिए अमन, चैन और सुकून की दुआएँ करेंगे।

उमरा की फ़ज़ीलत
कई हदीसों में है कि जो शख्स हज या उमरा के इरादे से निकले और सफर में ही इंतेक़ाल हो जाए, उसकी न अल्लाह की अदालत में पेशी होगी और न हिसाब-किताब, बल्कि उसे सीधा जन्नत में दाख़िल किया जाएगा। (तर्ग़ीब)

नबी-ए-करीम ﷺ ने फ़रमाया कि बैतुल्लाह इस्लाम के स्तंभों में से एक अहम स्तंभ है। जो शख्स हज या उमरा करके वापस लौटता है, वह अज्र-ओ-सवाब और ग़नीमत के साथ लौटता है। ग़नीमत का मतलब यह है कि अल्लाह दुनिया में भी उस खर्च का बेहतर बदला अता फ़रमाता है।
एक हदीस में यह भी है कि जो शख्स मक्का के सफर में जाते हुए या लौटते हुए इंतक़ाल कर जाए, उसकी भी पेशी और हिसाब-किताब नहीं होगा और वह सीधे जन्नत में दाख़िल होगा।
उमरा पर जाने वालों को रवाना करने वालों में कई लोग मौजूद रहे
उमरा करने वालों से मोअद्दबाना गुज़ारिश की गई कि मुल्क में रहने वाले तमाम लोगों के हक़ में दुआ फरमाएँ कि अल्लाह हमारे मुल्क के बाशिंदों में मोहब्बत और एकता पैदा करे और मुल्क के दुश्मनों को नेस्त-ओ-नाबूद फरमा दे।
आमीन या रब्बुल आलमीन।

