दशहरे के दिन ओमकार गुप्ता का अहंकार चूर, वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार हुए सीज | New India Times

गणेश मौर्या, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:

दशहरे के दिन ओमकार गुप्ता का अहंकार चूर, वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार हुए सीज | New India Times

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक रावण दहन हुआ और सत्य की विजय का जश्न मनाया गया — वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा के चेयरमैन ओमकार गुप्ता के खिलाफ उत्तर प्रदेश शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। शासन ने उनके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए हैं। भाजपा से जुड़े चेयरमैन को 15 दिनों के भीतर आरोपों पर जवाब देना होगा, और जब तक वे दोषमुक्त नहीं हो जाते, उन्हें नगर पंचायत के कार्यों में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं होगी। इस कार्रवाई से जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, जबकि सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध में बहस छिड़ी हुई है।

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पृष्ठभूमि: फरवरी 2025 में सभासद विनोद भारती द्वारा दिए गए 22 सूत्रीय शिकायती पत्र के आधार पर जिलाधिकारी ने जांच समिति गठित की थी। जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं — जैसे कि जेके इंफ्रा फर्म को नियमों के खिलाफ टेंडर देना, शर्तों में मनमानी छूट देना और बाद में उसी फर्म को ब्लैकलिस्ट करना। चेयरमैन पर यह भी आरोप हैं कि उन्होंने धरना-प्रदर्शन कर कामकाज बाधित किया, 28 जनवरी से 1 फरवरी 2025 तक सफाईकर्मियों को काम से रोका, जिससे सफाई व्यवस्था चरमरा गई। इसके अलावा आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन में देरी, रुबी के उत्तराधिकार नामांतरण में जानबूझकर विलंब, और सभासद विनोद कुमार पर हमले जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।

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रिपोर्ट और कार्रवाई:
तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश सिंह की 13 और 22 मार्च 2025 की रिपोर्ट में चेयरमैन की गतिविधियों को राष्ट्र, समाज और शासकीय व्यवस्था के लिए हानिकारक बताते हुए उनके अधिकार सीज करने की सिफारिश की गई थी, जिसे अब शासन ने लागू कर दिया है।

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चेयरमैन का पक्ष: ओमकार गुप्ता ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए कहा, “विवाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से शुरू हुआ। कर्मचारियों से मारपीट की एफआईआर 22 दिन बाद दर्ज की गई। हम तथ्यों के साथ अपना जवाब देंगे।” जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने कहा, “यह शासन का निर्णय है। अनियमितताओं की जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।” वर्तमान में सोशल मीडिया पर चेयरमैन के समर्थन और विरोध में प्रतिक्रियाएं तेज़ी से सामने आ रही हैं। अतिक्रमण हटाने से शुरू हुआ यह विवाद अब जांच के अगले चरण और चेयरमैन के जवाब पर निर्भर करता है, जो जिले की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।

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