देवेन्द्र फडणवीस 2.0: पुलिस के खिलाफ़ वकीलों का काम बंद आंदोलन, सड़क पर उतरे दंगा पीड़ित | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

देवेन्द्र फडणवीस 2.0: पुलिस के खिलाफ़ वकीलों का काम बंद आंदोलन, सड़क पर उतरे दंगा पीड़ित | New India Times

औरंगाबाद (छत्रपति संभाजी नगर) के सातारा पुलिस स्टेशन प्रभारी संग्राम ताठे द्वारा वकीलों से बदतमीजी से पेश आने और गैर कानूनी तरीके से फौजदारी दायर करने के विरोध मे जलगांव जिले के जामनेर वकील संघ ने काम बंद आंदोलन किया है। पेशे से वकील पत्रकार मित्र ने सोशल मीडिया पर आंदोलन की जानकारी देते हुए बताया कि एडवोकेट सिद्धार्थ बनसोडे एडवोकेट किशोर वैष्णव पर पुलिस निरीक्षक संग्राम ताठे ने गैर कानूनी तरीके से फौजदारी दायर की उनके साथ पेशेवर आरोपियों की तरह बर्ताव किया। दोनों वकीलों की समाज मे बदनामी हो इस प्रकार से दारोगा ने मामले को तूल दिया।

देवेन्द्र फडणवीस 2.0: पुलिस के खिलाफ़ वकीलों का काम बंद आंदोलन, सड़क पर उतरे दंगा पीड़ित | New India Times

ब्लॉक वकील संघ अध्यक्ष बी एम चौधरी , सचिव एड०महेंद्र पाटील , एड०सोनाली सुरवाडे समेत वकीलों ने तहसीलदार नानासाहब आगले को मांग पत्र सौंपा है जिसमें सरकार से मांग कि है कि पुलिस निरीक्षक संग्राम ताठे पर सख़्त कार्रवाई की जाए। वकीलों पर हुए पुलिसिया अन्याय के विरोध में वकील संघ ने दिन भर काम बंद की भूमिका को अपनाया। जिसके तहत कोर्ट में किसी भी मुकदमें की सुनवाई के लिए कोई भी वकील अपने मुवक्किल की पैरवी करने के लिए कोर्ट के सामने पेश नहीं हुआ। 31 दिसंबर 2024 की रात मंत्री गुलबराव पाटील के गांव पालधी में कथित तौर पर भड़काई गई सांप्रदायिक हिंसा में आग के हवाले कर दी गई दुकानों के नुकसान के बदले सरकार से आर्थिक मदद पाने के लिए पीड़ित मुसलमानों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया है।

देवेन्द्र फडणवीस 2.0: उद्धव ठाकरे कि सरकार गिराकर सत्ता में लौटे देवेन्द्र फडणवीस तिसरी बार महाराष्ट्र के गृह मंत्री बने हैं। फडणवीस के गृह मंत्री रहते बीते तीन साल में राज्य की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। सत्ताधारी विधायको द्वारा थानो मे पिस्टल से फायरिंग , पोस्को , बलात्कार , हत्याएं , लूट , अपहरण , बीड माफिया राज़ का शिकार संतोष देशमुख , पुलिस रिमांड मे मारा दिया गया कानून का छात्र सोमनाथ सूर्यवंशी जैसे सैकड़ों केसेस ने राज्य के क्राइम रेशों को तेजी से बढ़ा दिया है। लोकतंत्र में लोक कमजोर कर दिए गए हैं। लोगों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों ने लोगो के ऊपर शासन करने उनका आर्थिक शोषण करने के लिए तंत्र यानी संस्थाओं (सिस्टम) को मजबूत कर दिया है। इस तकनीक ने लोकतंत्र की व्याख्या को बदल कर रख दिया है।

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