राजनीत ने बिगाड़ा अनुशासन: अतिक्रमण हटाने के लिए सरकारी तिजोरी से फूंकने पड़ रहे हैं लाखों रुपए | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

राजनीत ने बिगाड़ा अनुशासन: अतिक्रमण हटाने के लिए सरकारी तिजोरी से फूंकने पड़ रहे हैं लाखों रुपए | New India Times

31 दिसंबर की रात मंत्री गुलबराव पाटील के गांव पालधी में हुई सांप्रदायिक हिंसा के लिए अतिक्रमण को एक कारण बताया गया। मुख्य कारण था विधानसभा चुनाव में मुस्लिम बाहुल्य इलाके के बूथ पर मंत्री जी को मिले कम वोट जिसे गोदी मीडिया ने छुपा दिया। इस घटना के बाद प्रशासन ने जामनेर में अतिक्रमण हटाओ अभियान का आग़ाज़ किया। नगर निगम तिराहे से गांधी चौक की सड़क पर सब्जी मंडी का शोर गुल फ़िलहाल शांत हो गया है। निगम के नए मार्केट का बेसमेंट छोड़ कर सड़क पर लगने वाले सब्जी के ठेले उस राजनीत का नतीजा है जिसे समय समय पर वोटो के लिए साधा जाता आ रहा है। मंत्री गिरीश महाजन का आलिशान बंगला इसी परिसर में है।

राजनीत ने बिगाड़ा अनुशासन: अतिक्रमण हटाने के लिए सरकारी तिजोरी से फूंकने पड़ रहे हैं लाखों रुपए | New India Times

साढ़े बारा साल से निगम की सत्ता महाजन के क़ब्जे में होने के बावजूद जिलाधिकारी और निगम मिलकर शहर के लिए एक हॉकर्स जोन मंजूर नहीं करवा सके हैं यह हाल है मिनी बारामती का। आखिरी बार 19 जून 2024 को शहर में अतिक्रमण हटाया गया था इसके पहले कई बार हटाया गया और निगम की तिजोरी से लाखों रुपया फूंका गया। पुनर्वास के नाम पर 2012 में मंजूर BOT मॉल्स का एक एक दुकान धन्नासेठों को स्नेह और स्वामी भक्तो को इनाम के रूप में दिया गया है। देश का बेरोजगार नौजवान सड़क पर सोयाबीन बिरयानी चाय पकौड़ा बेच कर धर्म कि रक्षा कर रहा है और नेता प्रॉपर्टी बना रहे हैं। जामनेर एक ऐसा शहर है जो सिर्फ एक मुख्य सड़क से शुरू हो कर उसी पर ख़त्म हो जाता है। न कोई रिंग रोड न बाय पास और न कमाई का मुकम्मल सोर्स। यहां सरकारी नौकरपेशा लोगों द्वारा किए जाने वाले लेनदेन के भरोसे गरीबों की रोजी रोटी चलती है। नगर परिषद चुनाव से पहले शहर के अलग अलग इलाकों में हॉकर्स जोन निर्धारित किए जाने की मांग पर लोग जोर दे रहे हैं।

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