भाजपा की केन्द्र में बहुमत की सरकार नहीं बनने से अब बदलाव की तरफ बढ़ने लगी? हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की टिकट पर दो मुस्लिम उम्मीदवार लड़ेंगे चुनाव | New India Times

अशफ़ाक़ क़ायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:

भाजपा की केन्द्र में बहुमत की सरकार नहीं बनने से अब बदलाव की तरफ बढ़ने लगी? हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की टिकट पर दो मुस्लिम उम्मीदवार लड़ेंगे चुनाव | New India Times

2019 में केन्द्र में भारी बहुमत से भाजपा द्वारा सरकार बनाने के बाद मुस्लिम मुक्त केन्द्रीय मंत्रीमंडल व मुस्लिम मुक्त पार्टी को बनाने की तरफ तेजी से आगे बढ़ने से एक दफा तो लगने लगा कि भाजपा अब मुस्लिम को लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा व विधानपरिषद में टिकट देने से आगे भी परहेज करेगी। हरियाणा में अभी दो मुस्लिम को भाजपा ने उम्मीदवार बनाकर एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है।

पहले केन्द्रीय मंत्रीमंडल से एक एक करके सभी मुस्लिम को बाहर का रास्ता दिखाया गया। फिर राज्यसभा से इसी तरह आऊट किया। लोकसभा में केरल की एक सीट छोड़कर बाकी किसी मुस्लिम को उम्मीदवार नहीं बनाया। राज्यों में भी विधानसभा व विधानपरिषद चुनाव में मुस्लिम को उम्मीदवार बनाने से भाजपा ने परहेज किया। हर मुस्लिम इश्यू पर भाजपा व उसकी सरकार मुस्लिम के मामले में मुखर होकर सामने आई। जिससे मुस्लिम समुदाय में नाराज़गी बढ़ी।

राजस्थान में पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा दो व दो से अधिक उम्मीदवार मुस्लिम को बनाती आई। फिर एक मात्र यूनुस खा को टिकट देने लगी। यूनुस खां को दो दफा वसुंधरा राजे सरकार में मंत्री भी बनाया। अब 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राजस्थान में एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया। यूनुस खा भाजपा से बगावत करके डीडवाना से निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक बन गये। भाजपा ने हरियाणा की कुल नब्बे सीटों में से दो मुस्लिम उम्मीदवार बनाये उनमें फिरोजपुर झिरका से नसीम अहमद व पुन्हाना से ऐजाज खान है। यह दोनों सीटें मेवात बेल्ट की है। जहां पीछले से तनाव बना था।

प्रधानमंत्री मोदी के दो कार्यकाल में भाजपा के नेताओं व उसके समर्थक संतों ने मुस्लिम को टारगेट करके खूब अजीब अजीब ब्यान तक दिये। सरकार ने अनेक इश्यू पर मुस्लिम समाज को डायरेक्ट-इंडायेक्ट सामने रखकर पोलिसी बनानी की कोशिश की। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने पर मिलीजुली सरकार बनने के बाद भाजपा में मामूली बदलाव नज़र आ रहा है। यह इनकी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। लेकिन मिलीजुली सरकार बनने से प्रधानमंत्री मोदी में बदलाव देखा जा रहा। जिसका कारण सहयोगी दलों का दबाव भी हो सकता है।

अक्टूबर में जम्मू व कश्मीर एवं हरियाणा के होने वाले विधानसभा चुनाव की आ रही हवाओं से लगता है कि कश्मीर में भाजपा की सरकार नहीं बन रही है। जबकि हरियाणा में भाजपा की सरकार बदल रही है। हरियाणा में भाजपा सरकार की भागीदार रही जेजेपी की बहुत बूरी गत होने वाली है। देखना होगा कि भाजपा द्वारा मुस्लिम को उम्मीदवार बनाना हरियाणा तक सीमित रहता है या फिर आगे बढ़ता है। राजनीति में सत्ता की चाहत कुछ भी करा सकती है।

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