अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:
ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की औचक कार्रवाई के बाद मामला गरमा गया है। मदरसे में रह रहे 26 बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किए जाने को लेकर भोपाल मध्य के विधायक आरिफ मसूद ने आयोग की अध्यक्ष को पत्र लिखकर कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विधायक ने बिना पूर्व सूचना कार्रवाई किए जाने पर आपत्ति जताते हुए मदरसा प्रबंधन को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय देने और बच्चों को उनके माता-पिता के संरक्षण में सौंपने की मांग की है।

विधायक आरिफ मसूद द्वारा 24 अक्टूबर 2026 को लिखे गए पत्र के अनुसार, 23 अक्टूबर को बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने ग्वालियर की झांसी रोड स्थित एजी ऑफिस के पास संचालित दारुल कुरआन मदरसे में औचक निरीक्षण किया था। पत्र में उल्लेख किया गया है कि कार्रवाई के दौरान मदरसे में रह रहे 18 लड़कों और 8 लड़कियों सहित कुल 26 बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
पत्र में विधायक ने दावा किया है कि मदरसे में रह रहे सभी 26 बच्चे किसी भी प्रकार के अवैध बंधन या दबाव में नहीं थे। उनके अनुसार, बच्चों को माता-पिता और वैधानिक अभिभावकों की पूर्ण सहमति एवं लिखित मंजूरी से धार्मिक और बुनियादी शिक्षा के लिए मदरसे में रखा गया था। पत्र में यह भी कहा गया है कि बच्चों के परिजन उनकी देखभाल, रहने और खान-पान की व्यवस्था से संतुष्ट हैं।
आरिफ मसूद ने पत्र में कहा कि मदरसा प्रबंधन को अपनी स्थिति स्पष्ट करने अथवा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पूर्व में कोई नोटिस या सूचना नहीं दी गई। उनके मुताबिक, अचानक हुई कार्रवाई से परिसर में मौजूद छोटे बच्चों में भय का माहौल बना और उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
विधायक ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि बच्चों को मदरसे से हटाकर केयर होम यानी संरक्षण गृह भेजे जाने की जानकारी मिलने के बाद उनके परिजनों में चिंता और नाराजगी है। पत्र के अनुसार, कई अभिभावक मौके पर पहुंचे और बच्चों को ले जाने पर आपत्ति दर्ज कराई। विधायक ने यह भी कहा कि मदरसे का भवन निर्माणाधीन है और प्रबंधन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के प्रयास कर रहा है।
विधायक आरिफ मसूद ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि मदरसा प्रबंधन को आवश्यक दस्तावेज एवं मान्यता संबंधी कागजात प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। उन्होंने पत्र में मांग की है कि तब तक बच्चों को उनके माता-पिता के संरक्षण में सौंपने पर विचार किया जाए।
फिलहाल, विधायक के पत्र में उठाए गए सवालों और दावों पर संबंधित आयोग तथा प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है। बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और उनके सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण होगा।

