तारिक़ खान, ब्यूरो चीफ, रायसेन (मप्र), NIT:
सरकारी दफ्तरों में आम आदमी से उम्मीद की जाती है कि वह अपने दस्तावेज संभालकर रखे, समय पर आवेदन करे और नियमों का पालन करे। लेकिन जब सरकारी कार्यालयों में ही फाइलों के बस्ते अव्यवस्थित ढंग से रखे दिखाई दें, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सरकारी रिकॉर्ड के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?
रायसेन कलेक्ट्रेट में नवागत कलेक्टर द्वारा विभिन्न विभागों के निरीक्षण के दौरान सामने आई तस्वीरें प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। तस्वीरों में एक कक्ष के भीतर फाइलों के बस्ते बड़ी संख्या में एक-दूसरे के ऊपर रखे दिखाई दे रहे हैं। अलमारियों के ऊपर और आसपास भी बस्तों का ढेर नजर आ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकारी रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने, उनकी नियमित साफ-सफाई कराने और सुरक्षित तरीके से संधारित करने की जिम्मेदारी ठीक से निभाई जा रही है?
फाइलों के बस्तों पर धूल, जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं?
सरकारी फाइलें महज कागजों का पुलिंदा नहीं होतीं। इन्हीं में आम नागरिकों के आवेदन, राजस्व प्रकरणों, जमीन संबंधी मामलों और विभिन्न शासकीय कार्यों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज दर्ज होते हैं। ऐसे रिकॉर्ड का व्यवस्थित रखरखाव बेहद जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज आसानी से उपलब्ध हो सकें।
तस्वीरों में जिस तरह बस्ते एक के ऊपर एक रखे नजर आ रहे हैं, उसे देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इनकी नियमित साफ-सफाई और उचित व्यवस्था पर ध्यान दिया जाता है? क्या संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को यह अव्यवस्था दिखाई नहीं देती, या फिर सरकारी रिकॉर्ड का रखरखाव उनकी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है?
निरीक्षण सिर्फ देखने तक सीमित न रहे
नवागत कलेक्टर द्वारा विभिन्न विभागों का निरीक्षण करना प्रशासनिक व्यवस्था को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन निरीक्षण की सार्थकता तभी होगी, जब कार्यालयों में दिखाई देने वाली कमियों को दूर करने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएं।
जरूरत है कि कलेक्ट्रेट के विभिन्न विभागों में रखे पुराने रिकॉर्ड का उचित वर्गीकरण कराया जाए, फाइलों के बस्तों को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखा जाए और रिकॉर्ड कक्षों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखने और जरूरत के समय उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
अब सवाल यह है कि जब कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र में ही फाइलों के बस्तों की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरे सरकारी कार्यालयों की स्थिति कैसी होगी? क्या नवागत कलेक्टर इस ओर ध्यान देकर संबंधित अधिकारियों को रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने के निर्देश देंगे, ताकि सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यप्रणाली में भी सुधार हो सके?

