अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:
कौमी ख़िदमतगार भोपाल के हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड से मांग की है कि अनाथ (यतीम) बच्चों की शिक्षा के लिए संचालित योजना में इमाम व मोअज्ज़िन के बेटे-बेटियों को भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड की ओर से बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग देना सराहनीय पहल है। इसी तर्ज पर इमाम व मोअज्ज़िन के बच्चों की पढ़ाई के लिए भी विशेष योजना शुरू की जानी चाहिए।
हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने कहा कि मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड द्वारा सैकड़ों यतीम बच्चों की स्कूल फीस के लिए 21 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च करने और प्रत्येक बच्चे को 10 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता देने का प्रयास काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों से होने वाली आमदनी का इस्तेमाल जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा पर करना सकारात्मक कदम है। आर्थिक तंगी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मस्जिदों में इमामत और अजान की जिम्मेदारी निभाने वाले इमाम व मोअज्ज़िन समाज और कौम की धार्मिक एवं सामाजिक सेवाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला मासिक वेतन काफी कम होता है। महंगाई के इस दौर में सीमित आमदनी से परिवार चलाने के साथ बच्चों की स्कूल फीस, किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक जरूरतें पूरी करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
स्कूल फीस से लेकर किताबों और यूनिफॉर्म तक मिले सहायता
हाजी इमरान हारून ने मांग की कि मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड इमाम व मोअज्ज़िन हजरात के बच्चों की स्कूली और दीनी शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे। इसके तहत स्कूल फीस, किताबें, कॉपियां, स्कूल बैग, यूनिफॉर्म और पाठ्यक्रम से जुड़ी अन्य जरूरी सामग्री के लिए मदद दी जाए। इसके लिए अलग बजट निर्धारित कर पारदर्शी नीति बनाई जाए, ताकि जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ मिल सके।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में विद्यार्थियों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में इमाम-मोज्जिन हजरात के बच्चों की शिक्षा के लिए भी विशेष योजना बनाना समय की जरूरत है। इससे आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बच्चों को बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा।
इमाम व मोअज्ज़िन का वेतन बढ़ाने की भी उठाई मांग
हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने इमाम व मोअज्ज़िन के कम वेतन का मुद्दा उठाते हुए उनके मासिक वेतन में वृद्धि के लिए भी ठोस पहल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि वक्फ बोर्ड बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी में आर्थिक सहयोग देता है, तो इमाम व मोअज्ज़िन हजरात के परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी और वे अपने बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने पर ध्यान दे सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर मांग रखेगा। प्रतिनिधिमंडल इमाम व मोअज्ज़िन हजरात के बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष योजना शुरू करने, जरूरतमंद मुस्लिम परिवारों के विद्यार्थियों को सहायता देने और इमाम व मोअज्ज़िन के वेतन में बढ़ोतरी पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह करेगा।
हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने कहा कि यतीम बच्चों के साथ-साथ इमाम व मोअज्ज़िन और अन्य जरूरतमंद मुस्लिम परिवारों के बच्चों की शिक्षा में सहयोग करना समाज के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

