शरीफ़ अहमद खान, ब्यूरो चीफ, सोनभद्र (यूपी), NIT:
करमा थाना क्षेत्र के तितौली खुर्द गांव में बीते 22 अगस्त की रात हुई लाखों रुपये की चोरी के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस ने मामले में बनाए गए कथित फर्जी गवाहों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। वहीं, चोरी की घटना को एक माह बीत जाने के बाद भी पुलिस इसका खुलासा नहीं कर सकी है।
पीड़ित गुरु प्रसाद पुत्र मिठाईलाल के घर से लाखों रुपये के आभूषण, तीन हजार रुपये नकद सहित अन्य सामान चोरी होने की बात सामने आई थी। पीड़ित के अनुसार, घटना की सूचना करमा थाने को दी गई, लेकिन पुलिस करीब 20 दिनों तक उसे इधर-उधर घुमाती रही। इसके बाद 10 सितंबर को पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर चोरी की घटना से अवगत कराया गया और उचित कार्रवाई की मांग की गई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए 12 सितंबर को थाना दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी चर्चित गौड़ एवं पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के समक्ष भी पीड़ित ने अपनी समस्या रखी। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने तत्कालीन थाना अध्यक्ष सूर्यभान एवं उपनिरीक्षक जयशंकर यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया तथा मामले की जांच क्षेत्राधिकारी घोरावल को सौंप दी।
जांच रिपोर्ट में चोरी की पुष्टि नहीं
पीड़ित का आरोप है कि पूर्व में की गई जांच रिपोर्ट में चोरी की घटना को संदिग्ध बताया गया तथा कथित गवाहों के बयानों का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट में यह भी दर्शाया गया कि घटना के समय घर में परिवार के करीब छह लोग मौजूद थे, जिसके आधार पर चोरी की घटना को प्रथम दृष्टया संदिग्ध बताया गया।
पीड़ित गुरु प्रसाद का कहना है कि जांच रिपोर्ट में तितौली खुर्द के स्थान पर तितौली कला दर्शाया गया है, जबकि घटना उसके घर में हुई थी। उन्होंने जांच में दर्शाए गए कथित गवाहों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित का आरोप है कि घटना का खुलासा न होने से वह निराश और हताश है। उसने पुलिस के उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर चोरी की घटना का खुलासा करने तथा कथित फर्जी गवाहों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

