मक़सूद अली, ब्यूरो चीफ, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

अजात संप्रदाय के संस्थापक एवं क्रांतिकारी समाज सुधारक संत गणपती उर्फ हरी महाराज के अभंग को संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय के बी.ए. भाग-3, सत्र-6 के मराठी विषय के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इससे उनके सामाजिक समता, मानवता और जातिनिर्मूलन के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
संत गणपती उर्फ हरी महाराज का जन्म स्वतंत्रता पूर्व अमरावती जिले के मंगरूल दस्तगीर में हुआ था। उन्होंने जाति व्यवस्था, सामाजिक भेदभाव, कुरीतियों और अंधविश्वासों के खिलाफ जनजागरण किया। वे जाति व्यवस्था को नकारते थे और स्वयं को ‘अजात’ मानते थे। उनका उद्देश्य जाति, धर्म, पंथ, वर्ण और वंश के भेदभाव से मुक्त मानव समाज की स्थापना करना था।
सत्यशोधक विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने ‘श्वेत निशाणधारी अजातीय मानव संस्था’ की स्थापना की और अंतरजातीय विवाहों को प्रोत्साहित किया। ओवी और अभंगों के माध्यम से उन्होंने सामाजिक विसंगतियों, पाखंड, जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ प्रभावी ढंग से अपने विचार व्यक्त किए।
संत गणपती महाराज के अभंग को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने पर उनकी परपोती सुनयना अजात ने संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मिलिंद बारहाते, अधिष्ठाता डॉ. मोनाताई चिमोटे, मराठी अध्ययन मंडल के अध्यक्ष डॉ. काशिनाथ बऱ्हाटे, डॉ. प्रवीण बनसोड सहित मराठी अध्ययन मंडल के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

