मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
इस्लाम संपूर्ण मानव जाति के लिए अमन, शांति और भाईचारे का पैगाम देता है। पैगंबर मोहम्मद साहब को संपूर्ण संसार के लिए रहमत, दयावान और कृपालु बनाकर भेजा गया। उनकी शिक्षाओं में कहा गया है कि सच्चा मुसलमान वही है, जिसकी हाथ और जुबान से सभी लोग सुरक्षित रहें।
उक्त विचार मस्जिद आयशा में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मौलाना मोहम्मद आदिल ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म हर तरह के आतंकवाद, जुल्म और अत्याचार से दूर रहने की शिक्षा देता है।
इसी क्रम में मौलाना मोहम्मद हासिम ने कुरआन की सूरह अल-मायदा की आयत नंबर 32 का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस किसी ने एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या की, मानो उसने संपूर्ण संसार के लोगों की हत्या कर दी। वहीं, जिसने किसी एक इंसान की जान बचाई, मानो उसने संपूर्ण संसार के इंसानों की जान बचाई।
उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म किसी भी प्रकार की हिंसा या आतंकवादी गतिविधियों की अनुमति नहीं देता। जो लोग इस्लाम के नाम पर आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देते हैं, वे इस्लाम धर्म को बदनाम कर रहे हैं। भले ही उनके नाम मुस्लिम हों, लेकिन ऐसे लोग इस्लाम की शिक्षाओं का पालन नहीं करते।
उन्होंने आगे कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले लोग भी इस्लाम की मूल शिक्षाओं के विरुद्ध कार्य करते हैं। पहलगाम और मुंबई की आतंकवादी घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या जैसी घटनाएं इस्लाम की शिक्षाओं के पूरी तरह खिलाफ हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग धर्म या पहचान पूछकर लोगों की हत्या करते हैं, वे मानवता और इस्लाम की मूल शिक्षाओं दोनों के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं। ऐसी आतंकवादी गतिविधियां कुरआन की शिक्षाओं के खिलाफ हैं और इस्लाम को बदनाम करती हैं।

