मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

भारतीय संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता के तहत जिस प्रकार हिंदू समाज के लोगों को वेद ग्रंथों की शिक्षा सनातन धर्म के अनुसार दी जाती है, उसी प्रकार मुस्लिम समाज के बच्चों को भी पवित्र कुरान और हदीस की बुनियादी धार्मिक शिक्षा इस्लामी रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार मदरसों में प्रदान की जाती है।
यूपी और बिहार के दूर-दराज़ इलाकों के पसमांदा मुस्लिम समाज के बच्चे धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से देश के विभिन्न हिस्सों में जाते हैं। ईद से लगभग दो महीने पहले मदरसों के शैक्षणिक सत्र समाप्त हो जाते हैं, जिसके कारण बच्चों की छुट्टियां हो जाती हैं। इन छुट्टियों में बच्चे अपने माता-पिता और परिवार से मिलने घर जाते हैं और छुट्टियों के बाद अगले सत्र के लिए पुनः अपने संस्थानों तक ट्रेनों के माध्यम से पहुंचते हैं। यह परंपरा वर्षों पुरानी है।
हाल ही में यूपी और बिहार से यात्रा कर रहे इन बच्चों को मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर अधिकारियों द्वारा कथित रूप से मनमाने और अवैधानिक तरीके से रोका गया, जिससे मुस्लिम समाज में रोष व्याप्त हो गया। बताया जा रहा है कि ऐसी घटनाओं में पिछले कुछ वर्षों से वृद्धि हुई है।
लोगों का कहना है कि इन बच्चों के पास आवश्यक दस्तावेज़ मौजूद थे और पकड़े जाने के दो दिनों के भीतर उनके परिवार के सदस्य भी वहां पहुंच गए थे, इसके बावजूद उन्हें तुरंत नहीं छोड़ा गया। इस मामले में भोपाल के विधायक आरिफ़ मसूद ने हस्तक्षेप करते हुए प्रशासन के समक्ष बच्चों और मुस्लिम समाज का पक्ष मजबूती से रखा।
लगभग 12 दिनों तक रोके जाने के बाद बच्चों को उनके परिवारों के पास वापस भेज दिया गया। इस घटना को लेकर लोगों में काफ़ी नाराज़गी देखी गई।
विधायक आरिफ़ मसूद ने कहा कि बच्चों को इस तरह उनके परिवारों से अलग करना और बिना स्पष्ट कारण के उन्हें रोककर रखना एक गंभीर मामला है। उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि 12 दिनों तक बच्चों को कहां रखा गया और उनके साथ कैसा व्यवहार किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला मानवाधिकारों से जुड़ा है और इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस मुद्दे पर उनके वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं।
इस मामले में मुस्लिम विकास परिषद, भोपाल सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं और वकीलों ने भी सक्रिय भूमिका निभाते हुए बच्चों की मदद की।
साथ ही, समाज के लोगों से अपील की गई है कि बच्चों को मदरसों में भेजते समय सभी आवश्यक दस्तावेज़ और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करें, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके।

