अबरार अहमद खान/मुकीज खान, भोपाल (मप्र), NIT:
भोपाल के भदभदा इलाके के पास स्थित मस्जिद दिलकश भदभदा चौराहा एवं मस्जिद मोहम्मदी भदभदा भोपाल को राजधानी परियोजना भोपाल के अधिकारियों द्वारा ग्रीन बेल्ट में अवैध कब्जा बताकर कर इन्हें हटाने का नोटिस दिया गया है । दिए गए नोटिस में कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा में कब्जा न हटाने पर प्रशासन बलपूर्वक मस्जिद को हटाने की कार्रवाई करेगा।
इस पूरे मामले की कड़ी निंदा करते हुए जमीअत उलमा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि ये दोनों मस्जिदें दशकों पुरानी और रियासती दौर की ऐतिहासिक मस्जिदें हैं , जिनके दस्तावेज भी मौजूद हैं । ये मस्जिदें मध्यप्रदेश के गजट और वक्फ रिकॉर्ड में भी दर्ज हैं। इसके बावजूद इन्हें अवैध कब्जा बताकर तोड़े जाने का नोटिस देना पूरी तरह अन्यायपूर्ण कदम है।

उन्होंने सवाल किया कि इस तरह किसी भी पुरानी आबाद मस्जिद को अवैध कब्जा बताकर तोड़े जाने का नोटिस कैसे दिया जा सकता है उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास रहा है कि प्राचीन बस्तियां नदी , तालाब अथवा पानी के किनारे ही बसती थीं क्योंकि पहले के समय में नल, ट्यूबवेल जैसे सुविधाएं नहीं थीं। लोग नदियों, तालाबों, झीलों के किनारे बसते थे और वहीं अपने धार्मिक स्थल जैसे मंदिर-मस्जिद बनाते थे। आज उन्हीं बस्तियों को ग्रीन बेल्ट के नाम पर अवैध बताया जा रहा है, जबकि आज भी पूरे देश में सैकड़ों मंदिर-मस्जिद और बस्तियां जलस्रोतों के किनारे स्थित हैं ।
उन्होंने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि ग्रीन ट्रिब्यूनल की सूची में कई अन्य स्थान पहले से दर्ज हैं । शहर के कई बड़े अस्पताल और मेडिकल यूनिवर्सिटी तालाबों के कैचमेंट एरिया में बने हुए हैं, लेकिन सिर्फ मस्जिदों को तोड़ने की बात की जा रही है , जो एकतरफा और भेदभावपूर्ण है।
उन्होंने आगे कहा कि आजकल कुछ शरारती तत्व और सांप्रदायिक मानसिकता के लोग जानबूझकर मस्जिदों को निशाना बना रहे हैं। यदि सही जांच की जाए तो शहर में न जाने कितनी संपत्तियां अवैध निकलेंगी। उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे पर आवश्यक कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी और लोकतांत्रिक तरीकों से पुरजोर विरोध भी किया जाएगा।
अंत में उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव से मांग कि है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर धार्मिक स्थलो को इस तरह के नोटिस देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही करे और सभी प्रशासनिक अधिकारियों को आदेश दे कि वह मंदिरों और मस्जिदों के मामलों में निष्पक्ष, व्यापक और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण अपनाए।

