हनीफ खान, ब्यूरो चीफ, मिर्ज़ापुर (यूपी), NIT:

उत्तर प्रदेश विधान परिषद सचिवालय के तत्वावधान में नैनागढ़ पैलेस में संवैधानिक एवं संसदीय अध्ययन संस्थान, क्षेत्रीय शाखा उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित दो दिवसीय विचार संगोष्ठी का शुभारंभ विधान परिषद के सभापति एवं संस्थान के अध्यक्ष कुंवर मानवेंद्र सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किया। इस अवसर पर संस्थान के अवैतनिक सचिव डॉ. राजेश सिंह सहित अनेक विद्वान, शिक्षाविद् एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। संगोष्ठी का मुख्य विषय समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का महत्व एवं उसका सामाजिक प्रभाव रहा, जिसमें वक्ताओं ने अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए।
सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता के महत्व और उसके सामाजिक प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य किसी भी धार्मिक आस्था पर प्रहार करना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है। उन्होंने इस कानून की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता समाज में समानता और न्याय की भावना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। संगोष्ठी में वक्ताओं ने एक देश, एक कानून की अवधारणा पर अपने विचार रखे तथा समान नागरिक संहिता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
संस्थान के अवैतनिक सचिव डॉ. राजेश सिंह ने अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता के ऐतिहासिक, कानूनी और सामाजिक पहलुओं की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने शाहबानो प्रकरण का उदाहरण देते हुए समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और इसे शीघ्र लागू करने की अपील की। संगोष्ठी में सी.पी. राय, प्रमोद मिश्रा, प्रो. बृजेश चंद्रा, सुरेंद्र यादव, डॉ. बीना पांडेय, शशि, एडवोकेट विश्राम यादव, निराला, डॉ. अरुण यादव, डॉ. कुसुम मानसी द्विवेदी, मंजू यादव और नूतन सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने मंच से अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन, सामाजिक प्रभाव और राष्ट्रीय एकता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

