वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों के निर्धारित ठहराव को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। लखीमपुर खीरी के गोला और सीतापुर डिपो की चार सरकारी बसें कथित तौर पर मिश्रा ढाबे पर बिना निर्धारित ठहराव के रुकी रहीं। यात्रियों का आरोप है कि बसों के चालकों और परिचालकों की इस मनमानी के कारण उनका समय बर्बाद हुआ और उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ा।
यात्रियों के अनुसार, बीती रात 11:30 बजे से 12:30 बजे के बीच मिश्रा ढाबे पर एक के बाद एक चार रोडवेज बसें आकर रुकीं। इनमें गोला डिपो की बस संख्या यूपी 31 एटी 6519, सीतापुर डिपो की बस संख्या यूपी 78 जेएन 9314, सीतापुर डिपो की ही बस संख्या यूपी 78 केएन 0422 और गोला डिपो की बस संख्या यूपी 34 टी 9793 शामिल थीं। आरोप है कि पहली बस करीब आधे घंटे तक ढाबे पर खड़ी रही, जबकि अन्य बसें भी वहां रुक गईं।
बताया गया कि इन बसों में कुछ बसें लखनऊ से सीतापुर की ओर आ रही थीं, जबकि एक बस लखीमपुर, चारबाग, सीतापुर, ढखेरवा, निघासन, सिंगाही और तिकुनिया मार्ग पर संचालित होती है। यात्रियों का कहना है कि बिना निर्धारित ठहराव के बसों को ढाबे पर रोकने से उन्हें अनावश्यक इंतजार करना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ढाबे पर बसें रोकने के पीछे यात्रियों को वहां भोजन करने के लिए मजबूर करने और ढाबा संचालकों को अनुचित लाभ पहुंचाने की आशंका है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
परिवहन निगम के नियमों के तहत बसों का ठहराव निर्धारित व्यवस्था और अधिकृत स्थानों के अनुसार होना चाहिए। ऐसे में यदि बसों को बिना अनुमति किसी ढाबे पर रोका गया है, तो यह विभागीय अनुशासन से जुड़ा मामला हो सकता है। मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित बसों को रोकने के पीछे क्या कारण थे और इसमें किसी नियम का उल्लंघन हुआ या नहीं।
यात्रियों ने मांग की है कि परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक और सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक इस मामले का संज्ञान लेकर संबंधित बसों के चालकों और परिचालकों से स्पष्टीकरण मांगें। साथ ही, ढाबे पर बसों के ठहराव की वैधता की जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध वसूली सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
यात्रियों ने परिवहन मंत्री और निगम के उच्चाधिकारियों से इस मार्ग पर औचक निरीक्षण कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि अनधिकृत स्थानों पर बसें रोकने से यात्रियों का समय प्रभावित होने के साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं पैदा होती हैं। ऐसे में विभागीय अधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच कर यात्रियों को अनावश्यक परेशानी से राहत दिलानी चाहिए।

