यवतमाल में कथित फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों का मामला गरमाया, पुनः जांच की मांग तेज़ | New India Times

मक़सूद अली, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

यवतमाल में कथित फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों का मामला गरमाया, पुनः जांच की मांग तेज़ | New India Times

यवतमाल जिले में कथित फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों का मामला सामने आने से हलचल मच गई है। प्रमाणपत्रों की वैधता पर सवाल उठने के बाद सभी दिव्यांग प्रमाणपत्रों की पुनः जांच कराने की मांग जोर पकड़ रही है। प्रशासन की संभावित कार्रवाई को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मामले की जांच के दौरान एक अधिकारी का नाम सामने आने का दावा किया जा रहा है। संबंधित अधिकारी पर पद का दुरुपयोग कर आर्थिक लेन-देन करने के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही, ‘अप्पू’ नामक कथित बिचौलिए के माध्यम से कुछ लोगों को फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित अधिकारी पूर्व में अकोला और चंद्रपुर में कार्यरत थे तथा वर्तमान में यवतमाल में पदस्थ हैं। दिव्यांग मंडल में उनके अनुभव के आधार पर उन्हें संबंधित जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी अवधि में कथित अनियमितताएं होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

तीन लोगों के नाम चर्चा में

इस मामले में शेख अमीन (ईएनटी), रविंद्रकुमार जोशी (ईएनटी) और प्रकाश राठोड (ऑर्थो) के नाम सामने आने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि कथित बिचौलिए के माध्यम से लाखों रुपये के लेन-देन के जरिए फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र प्राप्त किए गए। हालांकि, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और इन आरोपों की सत्यता की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस संबंध में श्री वसंतराव नाईक शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के अधिष्ठाता तथा दिव्यांग मंडल के अध्यक्ष से संपर्क किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि दिव्यांग प्रमाणपत्रों की पुनः जांच के संबंध में विस्तृत जानकारी जल्द सार्वजनिक की जा सकती है।

जांच और कार्रवाई पर निगाहें

इस मामले को लेकर चिकित्सा महाविद्यालय परिसर से लेकर जिलेभर में चर्चा हो रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, सभी प्रमाणपत्रों की पुनः जांच की जाती है या नहीं और संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होती है या नहीं। फिलहाल, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है।

सभी दिव्यांग प्रमाणपत्रों की पारदर्शी जांच कर वास्तविक दिव्यांग लाभार्थियों के अधिकारों की रक्षा करने तथा किसी भी अनियमितता की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग उठ रही है।

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