रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

नवरात्रि के पावन पर्व पर केशव विद्यापीठ में श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ कन्या पूजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्था के संचालक श्री ओमप्रकाश शर्मा, शारदा समूह की सीईओ श्रीमती अंबिका टवली, प्राचार्या श्रीमती वंदना नायर, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की। इस अवसर पर नौ कुमारी कन्याओं के चरण पखारकर, हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाकर विधि-विधान से पूजन किया गया।

कन्या पूजन भारतीय संस्कृति में नारी सम्मान का प्रतीक
संस्था के संचालक श्री ओमप्रकाश शर्मा ने कन्या पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व है। भारतीय परंपरा में कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में नारी के प्रति सम्मान, श्रद्धा और समानता का भाव जागृत करने का माध्यम भी है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों एवं युवाओं को संस्कारवान बनाना और उनमें महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। कन्या पूजन जैसी परंपराएं विद्यार्थियों को व्यवहार के माध्यम से नारी सम्मान का महत्व समझाने वाली प्रभावी सांस्कृतिक एवं नैतिक शिक्षण पद्धतियां हैं। जब बाल्यावस्था से ही बच्चों के मन में सम्मान, संवेदनशीलता और सदाचार के संस्कार विकसित किए जाते हैं, तो उनका सकारात्मक प्रभाव उनके व्यक्तित्व और व्यवहार में दिखाई देता है।
संस्कारों से ही सशक्त होगा समाज
श्री शर्मा ने कहा कि आज स्मार्टफोन एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों को सही दिशा, सकारात्मक वातावरण और श्रेष्ठ संस्कार देना समय की आवश्यकता है। विद्यालय केवल किताबी ज्ञान देने का केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व विकास का भी महत्वपूर्ण स्थान है। कन्या पूजन जैसे आयोजन बच्चों के मन में भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था जागृत करने के साथ-साथ महिलाओं के प्रति आदर, सुरक्षा और सम्मान की भावना को सुदृढ़ करने में सहायक होते हैं।
श्री शर्मा ने कहा कि नारी सम्मान केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे अपने विचारों, व्यवहार और दैनिक जीवन में अपनाना आवश्यक है। कन्या पूजन इसी भावना को आत्मसात करने का अवसर है। यदि बचपन से ही विद्यार्थियों को नारी के प्रति सम्मान और गरिमा का महत्व समझाया जाए, तो एक संवेदनशील, संस्कारित एवं सुरक्षित समाज के निर्माण की दिशा में सार्थक कदम उठाया जा सकता है।
कार्यक्रम के सफल संचालन में शिक्षिका बोशनी खंगेमबम का विशेष सहयोग रहा।

