जैतहरी में रेत परिवहन के दस्तावेजों में वाहन नंबर का अंतर, ई-टीपी के सत्यापन पर उठे सवाल | New India Times

ओमप्रकाश सोनी, जैतहरी/अनूपपुर, (मप्र), NIT:

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अनूपपुर जिले के जैतहरी क्षेत्र में रेत परिवहन से जुड़ा एक मामला दस्तावेजों के सत्यापन और खनिज परिवहन व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर रहा है। उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में हस्तलिखित उल्लेख के अनुसार, छत्तीसगढ़ से संबंधित टीपी पर वाहन क्रमांक MP65ZD2127 दर्ज होने की बात कही गई है, जबकि मध्यप्रदेश के खनिज विभाग के ई-खानिज पोर्टल से प्राप्त इंटर-स्टेट ट्रांजिट पास (ISTP) में वाहन क्रमांक MP65ZD8127 दर्ज दिखाई देता है।

ई-टीपी के स्क्रीनशॉट के अनुसार, इसका नंबर 126561736 है। दस्तावेज में परिवहन की तारीख 14 अक्टूबर 2026, समय दोपहर 12:18 बजे, खनिज का नाम रेत, मात्रा 3.00 घनमीटर, लोडिंग स्थान मलादांड, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ तथा गंतव्य सीताराम गुंजी बिहार, अनूपपुर, मध्यप्रदेश दर्ज है। दस्तावेज में ई-टीपी की वैधता उसी दिन शाम 3:18 बजे तक दर्शाई गई है।

जैतहरी में रेत परिवहन के दस्तावेजों में वाहन नंबर का अंतर, ई-टीपी के सत्यापन पर उठे सवाल | New India Times

वहीं, उपलब्ध दूसरे दस्तावेज पर 11 मई 2026 की मुहर और हस्तलिखित ISTP संख्या जैसा उल्लेख दिखाई देता है। इन दस्तावेजों के बीच संबंध, इन्हें जारी करने का उद्देश्य और वाहन संबंधी विवरण संबंधित विभाग से सत्यापित किया जाना आवश्यक है।

जैतहरी में रेत परिवहन के दस्तावेजों में वाहन नंबर का अंतर, ई-टीपी के सत्यापन पर उठे सवाल | New India Times

क्या एक वाहन की टीपी का इस्तेमाल दूसरे वाहन के लिए किया गया?

इस मामले का प्रमुख सवाल यह है कि क्या वास्तव में एक वाहन के लिए जारी परमिट का उपयोग दूसरे वाहन के रेत परिवहन में किया गया? उपलब्ध दस्तावेजों की तस्वीरों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि टीपी फर्जी है। इसकी पुष्टि के लिए छत्तीसगढ़ के संबंधित विभाग से मूल टीपी का सत्यापन, मध्यप्रदेश की ई-टीपी के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच और वाहन के पंजीयन विवरण का मिलान जरूरी है।

यदि दस्तावेजों की जांच में वाहन क्रमांक में बदलाव, गलत जानकारी देने या परमिट के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो यह गंभीर मामला होगा और नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

जैतहरी पुलिस की कार्रवाई, लेकिन आधिकारिक जानकारी का इंतजार

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 14 अक्टूबर 2026 को जैतहरी पुलिस ने रेत परिवहन से जुड़े मामले में कार्रवाई की। समाचार लिखे जाने तक कार्रवाई के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी थी। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि किस वाहन को जब्त किया गया, किन दस्तावेजों की जांच की गई और क्या आगे की कार्रवाई के लिए खनिज विभाग को सूचना दी गई।

पुलिस और खनिज विभाग से सवाल

  • क्या वाहन क्रमांक MP65ZD8127 के साथ प्रस्तुत ई-टीपी नंबर 126561736 का विभागीय सत्यापन कराया गया?
  • क्या छत्तीसगढ़ की मूल टीपी पर दर्ज वाहन क्रमांक MP65ZD2127 की संबंधित विभाग से पुष्टि की गई?
  • क्या 3 घनमीटर रेत की मात्रा और उसके लोडिंग स्थल तथा गंतव्य संबंधी विवरण की जांच की गई?
  • क्या इस मामले में वाहन मालिक, चालक और परमिट जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच की गई?
  • क्या पुलिस और खनिज विभाग संयुक्त जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करेंगे?

दस्तावेजों में विसंगति के दावे पर विभाग से जवाब की अपेक्षा

रेत परिवहन के नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि परमिट और वाहन के विवरण में विसंगति पाई जाती है, तो उसकी जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही, किसी दस्तावेज को फर्जी घोषित करने से पहले आधिकारिक सत्यापन और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

दैनिक सत्य व्यूह की मांग है कि संबंधित विभाग ई-टीपी नंबर 126561736, दोनों वाहन क्रमांकों और 14 अक्टूबर को हुई कार्रवाई की जांच कर तथ्यों को सार्वजनिक करें। यदि दस्तावेजों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

इस संबंध में जैतहरी थाना प्रभारी से जानकारी लेने के लिए फोन किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

सवाल सीधा है—क्या यह केवल दस्तावेजों में त्रुटि का मामला है या परमिट के कथित दुरुपयोग का? इसका जवाब आरोपों से नहीं, बल्कि आधिकारिक जांच और प्रमाणों के आधार पर सामने आना चाहिए।

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