नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सिस्टम की खुली पोल! गधे के नाम पर जारी हुआ सर्टिफिकेट, NSUI ने जांच कर की उचित कार्यवाही की मांगी | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा और नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े विवादों के बीच अब मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने दावा किया है कि परिषद की ऑनलाइन व्यवस्था में आवश्यक दस्तावेजों के वास्तविक सत्यापन के बिना आवेदन आगे बढ़ने और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी होने की खामी सामने आई है।

रवि परमार के मुताबिक, उन्होंने परिषद की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की सत्यापन व्यवस्था को परखने के लिए परीक्षण किया। उनका दावा है कि आवेदन में गधे की फोटो अपलोड की गई और आवश्यक दस्तावेजों की जगह ऐसे दस्तावेज अपलोड किए गए, जिनसे किसी वास्तविक शैक्षणिक योग्यता की पुष्टि नहीं होती थी। इसके बाद निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान किया गया।

परमार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया के बाद गधे के नाम से नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी हो गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

“जब गधे का रजिस्ट्रेशन हो सकता है तो दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हो रहा?”

रवि परमार ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ऑनलाइन पोर्टल पर इस तरह का रजिस्ट्रेशन वास्तव में सफल हुआ है, तो परिषद की ओर से आवेदक की पहचान, फोटो, शैक्षणिक योग्यता और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मामला केवल तकनीकी खामी तक सीमित नहीं है। नर्सिंग रजिस्ट्रेशन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रमाणपत्र है और इसकी विश्वसनीयता सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है।

NSUI जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सामान्य ऑनलाइन प्रमाणपत्र नहीं है। रजिस्टर्ड नर्सिंग प्रोफेशनल अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की देखभाल से जुड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में रजिस्ट्रेशन जारी करने से पहले शैक्षणिक योग्यता, संस्थान, मार्कशीट, पहचान और अन्य दस्तावेजों का वास्तविक सत्यापन जरूरी है।

तोमर ने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराई जाए। साथ ही यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित सर्टिफिकेट वास्तव में जारी हुए हैं या ऑनलाइन सिस्टम की किसी तकनीकी अथवा सत्यापन संबंधी कमी के कारण यह स्थिति बनी। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांचने की मांग की।

फर्जी रजिस्ट्रेशन से मरीजों की सुरक्षा पर खतरे की आशंका

रवि परमार ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बिना वास्तविक नर्सिंग योग्यता के रजिस्ट्रेशन प्राप्त कर लेता है और उसका इस्तेमाल अस्पताल, नर्सिंग होम या अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में नौकरी के लिए करता है, तो इससे मरीजों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि नर्सिंग रजिस्ट्रेशन किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पेशेवर पहचान प्रदान करता है। इसलिए फर्जी दस्तावेजों या बिना उचित सत्यापन के प्रमाणपत्र जारी होने की स्थिति को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

नर्सिंग विवादों के बीच रजिस्ट्रेशन व्यवस्था की जांच की मांग

अक्षय तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन नर्सिंग रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को लेकर सामने आए इस दावे की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

NSUI ने मांग की है कि MPNRC की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का तकनीकी ऑडिट कराया जाए, दस्तावेज सत्यापन की पूरी व्यवस्था की जांच हो और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में वास्तविक खामी है या नहीं।

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